डोनाल्ड ट्रंप ने किया शांति समझौते का एलान, इधर ईरान ने अमेरिका और इजराइल पर अपनी श्रेष्ठता का दावा ठोंका

डोनाल्ड ट्रंप ने किया शांति समझौते का एलान, इधर ईरान ने अमेरिका और इजराइल पर अपनी श्रेष्ठता का दावा ठोंका

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक शांति समझौते की घोषणा कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि इस नए समझौते के जरिए मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने और स्थिरता स्थापित करने में एक बड़ी कामयाबी मिलेगी। हमेशा की तरह अपने कड़े और लीक से हटकर लिए जाने वाले फैसलों के लिए मशहूर ट्रंप ने इस समझौते को वैश्विक शांति की दिशा में अपनी एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया है। हालांकि, इस समझौते की रूपरेखा और इसमें शामिल देशों की शर्तों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के बीच अभी से बहस छिड़ गई है।

एक तरफ जहां अमेरिकी प्रशासन इस समझौते को अपनी बड़ी उपलब्धि मानकर जश्न मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने इस पर बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया देकर माहौल को और गरमा दिया है। ईरान सरकार और वहां के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने एक आधिकारिक बयान जारी कर सीधे तौर पर अमेरिका और इजराइल पर अपनी सैन्य व रणनीतिक श्रेष्ठता स्थापित करने का दावा ठोंक दिया है। ईरान का कहना है कि यह समझौता अमेरिका की कोई कूटनीतिक सफलता नहीं, बल्कि ईरान की मजबूत रक्षा नीति और क्षेत्रीय ताकत के आगे अमेरिका व इजराइल का पीछे हटना है। ईरान ने साफ किया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम और राष्ट्रीय संप्रभुता के मामले में किसी भी देश के आगे नहीं झुकेगा और पश्चिमी देशों का कोई भी दबाव उन पर बेअसर रहेगा।

इस हाई-प्रोफाइल भू-राजनीतिक (Geopolitical) घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चिंताओं को लेकर एक नया मोड़ आ गया है। इजराइल ने भी ईरान के इस दावे पर तीखी नजर रखी हुई है, क्योंकि मध्य पूर्व में उसकी सुरक्षा सीधे तौर पर इन समीकरणों से जुड़ी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के इस शांति समझौते के एलान और ईरान के इस पलटवार ने यह साफ कर दिया है कि कागजों पर समझौते चाहे जो भी हों, जमीन पर दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई अभी भी बहुत गहरी है। आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य वैश्विक महाशक्तियों का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि यह नया समझौता क्षेत्र में सचमुच शांति लाता है या फिर दावों और प्रति-दावों के बीच तनाव को एक नए स्तर पर ले जाता है।