उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखी बाघिन
एक दशक बाद लौटी ‘बाघों की दहाड़’ की उम्मीद
गरियाबंद (चैनल इंडिया)। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लगे कैमरा ट्रैप में एक बाघिन की मौजूदगी दर्ज की गई है। विभाग का मानना है कि यह बाघिन प्राकृतिक रूप से विचरण करते हुए उदंती-सीतानदी के वनों में पहुंची है और अब इसे अपना स्थायी ठिकाना बना रही है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व को वर्ष 2009 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था, लेकिन पिछले एक दशक से यहां बाघों की स्थायी उपस्थिति दर्ज नहीं की गई थी। रिजर्व में अंतिम बार बाघ की पुष्टि 2019-20 में हुई थी, लेकिन वह भी आवागमन तक सीमित रही। ऐसे में कैमरा ट्रैप में स्वस्थ और आत्मविश्वास से विचरण करती इस बाघिन की तस्वीरें पूरे परिदृश्य के पुनर्जीवन का संकेत हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार बाघिन का क्षेत्र स्थापित करने की प्रक्रिया में होना दर्शाता है कि वह यहां प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल देख रही है।
वन विभाग ने रिजर्व के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में हाई-क्वालिटी कैमरा ट्रैप लगाए थे। पिछले एक माह से अलग-अलग लोकेशन पर मिली तस्वीरों और वीडियो से पुष्टि हुई कि यह एक ही बाघिन है, जो नियमित रूप से क्षेत्र में मूवमेंट कर रही है। उसकी गतिविधियां, बॉडी लैंग्वेज और टेरिटरी मार्किंग से साफ है कि वह यहां बसने के इरादे से आई है। वन विभाग ने बाघिन की सुरक्षा के लिए ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ गठित की है। विभाग का लक्ष्य अगले दो साल में उदंती-सीतानदी को ‘ब्रीडिंग पॉपुलेशन’ वाला रिजर्व बनाना है ताकि मध्य भारत के कान्हा-पेंच-अचानकमार कॉरिडोर से और बाघ यहां आ सकें।
वन विभाग का कहना है कि इस बाघिन की उपस्थिति केवल एक वन्यजीव की कहानी नहीं है, बल्कि यह आशा, पुनर्जीवन और प्रकृति की सकारात्मक प्रतिक्रिया का संदेश है। यह दर्शाता है कि उदंती-सीतानदी में किए गए संरक्षण प्रयास रंग ला रहे हैं। हमारा संकल्प है कि एसटीआर को फिर से मध्य भारत के प्रमुख बाघ परिदृश्यों में गौरवपूर्ण स्थान दिलाएं। बाघिन की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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