वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला खुलासा : इंसानी स्पर्म में 6 साल तक जिंदा रह सकता है हंतावायरस, सेक्सुअल ट्रांसमिशन का खतरा

वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला खुलासा : इंसानी स्पर्म में 6 साल तक जिंदा रह सकता है हंतावायरस, सेक्सुअल ट्रांसमिशन का खतरा

नई दिल्ली : विज्ञान और चिकित्सा जगत से एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आई है। चूहों से फैलने वाले जानलेवा 'हंतावायरस' (Hantavirus) को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नया और डरावना दावा किया है। नवीनतम शोध के मुताबिक, यह वायरस इंसानी स्पर्म (शुक्राणु) में 6 साल तक जीवित रह सकता है, जिससे इसके सेक्सुअल ट्रांसमिशन (शारीरिक संबंध के जरिए फैलने) का खतरा बेहद बढ़ गया है।

अब तक माना जाता था कि यह वायरस केवल संक्रमित चूहों के मल-मूत्र या लार के सीधे संपर्क में आने से फैलता है, लेकिन इस नए अध्ययन ने चिकित्सा जगत की चिंता बढ़ा दी है।

क्या कहता है नया वैज्ञानिक शोध?

यूरोपीय वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस शोध में पाया गया कि हंतावायरस से संक्रमित होकर ठीक हो चुके मरीजों के शरीर में भी यह वायरस लंबे समय तक छिपा रह सकता है।

  • स्पर्म बना सुरक्षित ठिकाना: टेस्ट में सामने आया कि ठीक होने के सालों बाद भी पुरुषों के वीर्य (Semen) में यह वायरस सक्रिय अवस्था में मौजूद था।

  • 6 साल की लंबी अवधि: शोधकर्ताओं के अनुसार, वायरस ने इंसानी स्पर्म में करीब 6 साल तक अपनी मौजूदगी बनाए रखी, जो किसी भी अन्य सामान्य वायरस की तुलना में बहुत लंबी अवधि है।

सेक्सुअल ट्रांसमिशन की बढ़ी आशंका

इस खोज के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि हंतावायरस से पीड़ित रह चुका व्यक्ति ठीक होने के बाद भी अपने पार्टनर को अनजाने में संक्रमित कर सकता है। हालांकि, हवा या चूहों के जरिए फैलने वाले मामलों की तुलना में सेक्सुअल ट्रांसमिशन के मामले कम देखे गए हैं, लेकिन इस संभावना को अब पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता।

क्या है हंतावायरस और इसके लक्षण?

हंतावायरस मुख्य रूप से चूहों और कृंतक (Rodents) प्रजाति के जीवों से इंसानों में फैलता है। यह मुख्य रूप से दो गंभीर बीमारियों का कारण बनता है: हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) (जो फेफड़ों को प्रभावित करता है) और हेमरेज बुखार।

शुरुआती लक्षण:

  • तेज बुखार और शरीर में असहनीय दर्द।

  • सिरदर्द, चक्कर आना और ठंड लगना।

  • पेट में दर्द, उल्टी या दस्त की शिकायत।

  • गंभीर स्थिति में फेफड़ों में पानी भरना और सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ होना।

क्या हैं बचाव के उपाय?

विशेषज्ञों का कहना है कि इस नए खुलासे के बाद हंतावायरस से ठीक हो चुके मरीजों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है:

  1. सुरक्षित संबंध: संक्रमण से ठीक होने के बाद भी एक निश्चित अवधि तक शारीरिक संबंध बनाते समय सुरक्षा (कॉन्डोम) का उपयोग बेहद जरूरी है।

  2. चूहों से दूरी: अपने घरों और कार्यस्थलों पर चूहों को न पनपने दें। उनके मल-मूत्र की सफाई करते समय मास्क और ग्लव्स का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।

  3. नियमित जांच: यदि कोई व्यक्ति पहले हंतावायरस की चपेट में आ चुका है, तो उसे पूरी तरह ठीक होने के बाद भी डॉक्टरों के संपर्क में रहना चाहिए और आवश्यक जांच करानी चाहिए।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नई खोज से हंतावायरस के इलाज और इसकी गाइडलाइंस में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।