नकटी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से 80 घर जमींदोज, पुनर्वास और आश्वासन को लेकर छिड़ा विवाद
रायपुर। राजधानी रायपुर के नकटी गांव में सोमवार तड़के प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद विवाद गहरा गया है। सुबह करीब 4 बजे बिजली आपूर्ति बंद करने के बाद बुलडोजर चलाकर करीब 80 मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए। प्रभावित लोगों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल हैं।
कार्रवाई के बाद मौके पर पहुंचे कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुनर्वास के नाम पर बड़े परिवारों को केवल एक-एक कमरा आवंटित किया जा रहा है, जहां बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उनका कहना है कि 12 से 14 सदस्यों वाले परिवारों के लिए यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि दो दिन पहले वे रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मिले थे। इस दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया था कि बरसात के मौसम में किसी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी और प्रशासन तथा ग्रामीणों के बीच समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने इस आश्वासन पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
कार्रवाई के दौरान कई भावुक तस्वीरें भी सामने आईं, जिनमें लोग अपने घरों का सामान सड़क किनारे रखे नजर आए। वहीं कुछ परिवार मलबे के बीच अपने छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ बैठे दिखाई दिए। प्रभावित बच्चों ने बताया कि कार्रवाई के समय वे घरों में थे और सुबह से भोजन तक नहीं कर पाए थे।
इधर प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में पात्र परिवारों को बसाने के लिए आवंटन की कार्रवाई जारी है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है और विपक्ष ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं।

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