राजेश अग्रवालः 94 वोटों की ऐतिहासिक जीतः सरपंच से मंत्री तक का संघर्षशील सफर

राजेश अग्रवालः 94 वोटों की ऐतिहासिक जीतः सरपंच से मंत्री तक का संघर्षशील सफर

अंबिकापुर विधानसभा सीट से विधायक राजेश अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है। खास बात यह है कि उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु और तत्कालीन डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव को हराकर विधानसभा चुनाव जीता। बेहद कांटे की इस लड़ाई में राजेश अग्रवाल ने सिर्फ 94 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर प्रदेशभर में सुर्खियां बटोरीं।

राजेश अग्रवाल सरगुजा जिले की अंबिकापुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह सामान्य सीट सरगुजा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी, लेकिन बाद में पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।

राजेश अग्रवाल का जन्म 1 जून 1967 को सरगुजा जिले के लखनपुर में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय चांदीराम अग्रवाल एक प्रतिष्ठित व्यापारी थे, जबकि माता का नाम बीरमा देवी अग्रवाल है। उनका परिवार व्यवसाय और कृषि से जुड़ा हुआ है। राजेश अग्रवाल की पत्नी का नाम सुनीता अग्रवाल है और उनके दो बच्चे हैं।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लखनपुर हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। पढ़ाई के बाद वे पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ गए। सामाजिक कार्यों में सक्रियता के चलते उनका रुझान राजनीति की ओर बढ़ा।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने ग्राम पंचायत कुंवरपुर से की। साल 2002 से 2005 तक वे उपसरपंच रहे। इसके बाद 2009 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ा, लेकिन मात्र एक वोट से हार गए। हालांकि, 2014 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर वे नगर पंचायत लखनपुर के अध्यक्ष बने।

साल 2017 में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और टीएस सिंहदेव से मतभेद के चलते उन्होंने भाजपा जॉइन कर ली। 2018 विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिला, लेकिन भाजपा ने 2023 में उन पर भरोसा जताते हुए अंबिकापुर से प्रत्याशी बनाया।

अंबिकापुर सीट लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ मानी जाती रही है और यहां टीएस सिंहदेव का मजबूत प्रभाव था। बावजूद इसके, 2023 विधानसभा चुनाव में राजेश अग्रवाल ने बड़ा उलटफेर करते हुए सिंहदेव को 94 वोटों से हरा दिया। राजेश अग्रवाल को 90,780 वोट मिले, जबकि टीएस सिंहदेव को 90,686 मत प्राप्त हुए।

सरपंच से लेकर विधायक और फिर मंत्री बनने तक का राजेश अग्रवाल का सफर संघर्ष, संगठन और राजनीतिक रणनीति का एक सजीव उदाहरण है।