लिवर सिरोसिस रोकथाम पर रायपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन, ‘छत्तीसगढ़ लिवर शील्ड’ की होगी शुरुआत

लिवर सिरोसिस रोकथाम पर रायपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन, ‘छत्तीसगढ़ लिवर शील्ड’ की होगी शुरुआत

रायपुर। इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (ISG) छत्तीसगढ़ चैप्टर और एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन्स ऑफ इंडिया (API) के संयुक्त तत्वावधान में 9 और 10 मई 2026 को राजधानी रायपुर में “प्रिवेंटिव हेपेटोलॉजी” विषय पर दो दिवसीय महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य राज्य के डॉक्टरों को लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम के सरल और प्रभावी उपायों की जानकारी देना है।

इस सम्मेलन में देशभर के प्रख्यात विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो लिवर रोगों की समय पर पहचान, सही जीवनशैली, आधुनिक उपचार पद्धतियों और रोकथाम के उपायों पर चिकित्सकों का मार्गदर्शन करेंगे। साथ ही डॉक्टरों को जांच प्रक्रिया, जोखिम कारकों की पहचान और समाज में जागरूकता बढ़ाने से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी जाएगी।

सम्मेलन के दौरान “छत्तीसगढ़ लिवर शील्ड कंसोर्टियम” की शुरुआत भी की जाएगी। यह मंच पूरे प्रदेश में लिवर रोगों की रोकथाम, जागरूकता, प्रशिक्षण और चिकित्सा सहयोग को बढ़ावा देने का कार्य करेगा।

अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर से आयोजन अध्यक्ष डॉ. देविंदर सिंह विरदी ने कहा कि लिवर सिरोसिस जैसी बीमारी को समय पर जागरूकता और सही कदमों के जरिए रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन और छत्तीसगढ़ लिवर शील्ड कंसोर्टियम राज्य में लिवर स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक सशक्त पहल साबित होगा।

रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल रायपुर के वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट एवं आयोजन सचिव डॉ. ललित निहाल ने बताया कि देशभर के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर फैटी लिवर, शराब से संबंधित लिवर रोग और वायरल हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की रोकथाम पर व्यापक चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़ लिवर शील्ड” के माध्यम से ऐसा संगठन तैयार किया जा रहा है, जिसकी सेवाएं राज्य के हर जिले तक पहुंच सकें।

अविनाश ग्रुप रायपुर के निर्देशक अरुण सिंघानिया ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि दो वर्ष पहले उनका लिवर ट्रांसप्लांट एक ब्रेन डेड डोनर के लिवर से हुआ था, जिससे उन्हें नया जीवन मिला। उन्होंने कहा कि उन्हें फैटी लिवर की बीमारी थी, जबकि उन्होंने कभी शराब का सेवन नहीं किया, इसके बावजूद उनका लिवर फेल हो गया। ट्रांसप्लांट के बाद वे पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी रहे हैं तथा कई बार विदेश यात्राएं भी कर चुके हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ लिवर शील्ड कार्यक्रम के सामुदायिक संरक्षक बनने की सहमति दी है और समाज में लिवर रोगों एवं अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए सहयोग प्रदान किया है।

वहीं, अंबिकापुर निवासी विनोद कुमार कश्यप का सफल लिवर ट्रांसप्लांट रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में किया गया। उन्हें उनके भाई श्री गौतम कुमार कश्यप द्वारा दान किए गए लिवर के एक हिस्से से नया जीवन मिला। उनके इस प्रेरणादायक और निःस्वार्थ योगदान के लिए सम्मेलन में विशेष सम्मान भी किया जाएगा।