23 साल पुराने रिश्वत कांड में हाईकोर्ट का फैसला: 73 वर्षीय पूर्व पटवारी की सजा घटाई, 30 अक्टूबर को सरेंडर का आदेश

23 साल पुराने रिश्वत कांड में हाईकोर्ट का फैसला: 73 वर्षीय पूर्व पटवारी की सजा घटाई, 30 अक्टूबर को सरेंडर का आदेश
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में सुधार के बदले ₹2,000 की रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व पटवारी माधव सिंह चंदेल की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है। हालांकि, घटना के 23 साल पुराने होने और आरोपी की वर्तमान उम्र 73 वर्ष होने को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने सजा की अवधि में रियायत दी है।

सजा में की गई कटौती
जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को घटा दिया है:
  • धारा 7 के तहत: 1 साल की सजा को घटाकर 6 महीने किया गया।
  • धारा 13(1)(डी) सहपठित 13(2) के तहत: 2 साल की सजा को घटाकर 1 साल किया गया।
  • सरेंडर का निर्देश: हाईकोर्ट ने 73 वर्षीय पूर्व पटवारी को 30 अक्टूबर 2026 तक निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के समक्ष आत्मसमर्पण कर शेष सजा भुगतने का आदेश दिया है।
साल 2003 में ACB ने बिछाया था जाल
यह मामला दुर्ग जिले का है। वर्ष 2003 में शिकायतकर्ता अर्जुन साहू ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से शिकायत की थी कि पटवारी माधव सिंह चंदेल जमीन के दस्तावेजों के सत्यापन के एवज में ₹2,000 की मांग कर रहा है। 31 दिसंबर 2003 को ACB की टीम ने ट्रैप बिछाकर केमिकल (फिनॉल्फ्थेलिन पाउडर) लगे नोटों के साथ पटवारी को गिरफ्तार किया था। निचली अदालत ने 2017 में आरोपी को दोषी ठहराते हुए कुल 3 साल की सजा सुनाई थी।

कोर्ट ने खारिज की बचाव पक्ष की दलीलें
हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि रिश्वत की रकम पटवारी की जेब से नहीं बल्कि बैग से मिली थी और बातचीत का टेप रिकॉर्डर कोर्ट में पेश नहीं किया गया। इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यद्यपि टेप रिकॉर्डिंग प्राथमिक साक्ष्य के रूप में पेश नहीं हुई, लेकिन मौखिक व अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। कोर्ट ने माना कि राजस्व रिकॉर्ड सुधारना पटवारी के आधिकारिक दायित्व में था और अभियोजन पक्ष ने रिश्वत मांगने का आरोप संदेह से परे साबित किया है।