113 करोड़ अब बट्टे खाते में
सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा
रायपुर (चैनल इंडिया)। राज्य में सरकारी सेवकों ने खजाने की रकम की फिजूलखर्ची, चोरी और गबन करके 113 करोड़ 60 लाख रुपए उड़ा दिए। इस तरह के मामलों की संख्या पौने तीन हजार से अधिक है। खास बात ये है कि इन मामलों की ओर जब सीएजी ने सरकार को ध्यान दिलाया तो ये जवाब आया कि गबन, धोखाधड़ी के लंबे समय से लंबित मामलों को बट्टे खाते में डालने और उनके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह तथ्य सीएजी की ताजा रिपोर्ट से सामने आया है।
रिपोर्ट में सीएजी ने छत्तीसगढ़ वित्त संहिता नियम के हवाले से कहा है, यह प्रावधान है कि प्रत्येक शासकीय कर्मचारी शासन को उसके द्वारा धोखाधड़ी या लापरवाही के कारण हुई किसी भी हानि या किसी अन्य शासकीय कर्मचारी द्वारा धोखाधड़ी या लापरवाही के कारण हुई किसी भी हानि के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होगा। उस सीमा तक, जिस सीमा तक उसने स्वयं के कार्यों या लापरवाही में योगदान दिया हो। साथ ही गबन या नुकसान के मामलों की रिपोर्ट महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) को दी जानी आवश्यक है।
नुकसान और धन गायब होने की कहानी
रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2025 तक फिजूलखर्ची, हानि, चोरी से संबंधित 2 हजार 181 प्रकरण लंबित थे, जिनमें 124.72 करोड़ की राशि शामिल थी। कुल 2 हजार 181 मामलों में से, 88.06 करोड़ से संबंधित 735 मामलों में विभागों विभागीय और आपराधिक जांच शुरू नहीं है। जबकि 36 करोड़ 60 लाख से संबंधित 1 हजार 433 मामलों मे विभागीय जांच शुरू की गई, लेकिन उसे अंतिम रूप नहीं दिया गया। केवल दशमलव 6 करोड़ से संबंधित 13 मामलों में विभागीय और आपराधिक कार्रवाई को अंतिम रूप दिया गया, लेकिन उनसे भी राशि वसूल नहीं की जा सकी।
दस साल से अधिक समय से लंबित
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2181 मामलों में से 0.54 करोड़ के 121 प्रकरण शासकीय धन/भंडार की चोरी से संबंधित थे, जबकि शासकीय सामग्री के गबन/ नुकसान से संबंधित 113.60 करोड़ की प्रकरणें दस साल से अधिक समय से लंबित थीं। इस ओर ध्यान दिलाए जाने पर राज्य शासन ने जवाब फरवरी-2026 में कहा है कि गबन धोखाधड़ी के लंबे समय से लंबित मामलों को बट्टे खाते में डालने और उनका समाधान करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।