जब मुख्यमंत्री और डॉ. रमन बने ‘शेर’ संघ प्रचारक इंद्रेश ने लगवाई दहाड़
बोले, ऐसा दहाड़ें कि लाहौर तक दे सुनाई, चौंक जाए पाकिस्तान
रायपुर (चैनल इंडिया)। मंच पर आपातकाल की गंभीर चर्चा चल रही थी, लोकतंत्र, संघर्ष और संविधान की बातें हो रही थीं, लेकिन कार्यक्रम के आखिर में माहौल अचानक बदल गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने मंच को कुछ पल के लिए ‘जंगल की पाठशाला’ बना दिया. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह समेत पूरा ऑडिटोरियम शेर की तरह दहाडऩे लगा। दावा तो यहां तक किया गया कि दहाड़ की गूंज सिंध, लाहौर और ढाका तक पहुंचनी चाहिए, जिससे पाकिस्तान चौक जाए।
अपने संबोधन के अंत में इंद्रेश कुमार ने कहा कि इतने लंबे समय तक बैठे रहने के लिए सभी लोग बधाई के पात्र हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अगर क्लास में छात्र इतने देर बैठ जाएं तो मास्टर जी भी कह दें कि अब बहुत हो गया लेकिन यहां सभी लोग आखिर तक डटे रहे। इसके बाद उन्होंने कहा कि अब विदाई से पहले एक छोटा सा खेल खेलेंगे। उन्होंने सभी से दोनों हाथ सामने लाने को कहा फिर दोनों पंजे कान के पास ले जाने को कहा। उसके बाद तीसरे इशारे पर शेर की तरह दहाडऩे का निर्देश दिया। दहाड़ लगवाने से पहले इंद्रेश कुमार ने कहा कि आवाज केवल यहीं नहीं सिंध तक जानी चाहिए। लाहौर पहुंचे तो और अच्छा। मानसरोवर तक सुनाई दे तो बहुत सुंदर और ढाका तक पहुंच जाए तो इंकलाब आ जाएगा। इसके बाद पूरा हॉल शेर की दहाड़ से गूंज उठा।
इस पूरे दृश्य का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह रहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी बाकी लोगों के साथ उसी अंदाज में नजर आए। दोनों नेताओं ने हाथों के खुले पंजे कानों के पास रखे। चेहरा शेर की मुद्रा में बनाया और इंद्रेश कुमार के निर्देश पर जोरदार दहाड़ लगाई। मंच पर बैठे अन्य भाजपा नेता और सभागार में मौजूद कार्यकर्ताओं ने भी पूरे उत्साह के साथ इस गतिविधि में हिस्सा लिया। कुछ पल के लिए पूरा ऑडिटोरियम शेरों की दहाड़ से गूंजता दिखाई दिया।
वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि अब हर व्यक्ति अपने मन से पूछे कि उसकी आवाज लाहौर और ढाका तक पहुंची या नहीं। उन्होंने कहा कि बचे हुए जीवन में हमें यही काम करना है कि हमारी आवाज वहां तक पहुंचे ताकि जन भी वापस आए, जमीन भी वापस आए। खोया हुआ मान और जमीन वापस आनी चाहिए। इसी संकल्प के साथ आगे बढऩा है। आपातकाल स्मृति दिवस का यह कार्यक्रम अपने राजनीतिक संदेशों के साथ-साथ इस अनोखे दृश्य की वजह से भी चर्चा में आ गया। जहां गंभीर भाषण के बाद मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शेर की तरह दहाड़ते नजर आए। देखते ही देखते यह दृश्य पूरे कार्यक्रम का सबसे चर्चित पल बन गया।

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