रायपुर: छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और मौसम केंद्र रायपुर ने 13 अगस्त के लिए विशेष मौसम बुलेटिन जारी करते हुए उत्तर छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी में बने नए मौसमी तंत्र और मानसून द्रोणिका (Trough Line) के प्रभाव से प्रदेश के उत्तरी और मैदानी हिस्सों में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश और वज्रपात की आशंका जताई गई है।
उत्तर छत्तीसगढ़ के इन जिलों में यलो और ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, सरगुजा संभाग और उससे लगे इलाकों में बारिश का दौर सबसे ज्यादा प्रभाव दिखाएगा:
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भारी बारिश प्रभावित जिले: सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB), जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और कोरबा जिलों में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है।
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मध्यम से भारी बारिश: बिलासपुर, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायपुर, दुर्ग और कबीरधाम जिलों में भी बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम और कुछ जगहों पर भारी बौछारें गिर सकती हैं।
क्यों बदला मौसम का मिजाज?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण और कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) सक्रिय हो गया है। इसके साथ ही मानसूनी ट्रफ रेखा छत्तीसगढ़ के मध्य भागों से होकर गुजर रही है। इस मौसमी सिस्टम के कारण बड़े पैमाने पर नमी आ रही है, जिससे उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का नया दौर शुरू हुआ है।
नदियां उफान पर, तापमान में भारी गिरावट
लगातार हो रही बारिश के चलते उत्तर छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियों और पहाड़ी नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। बारिश के कारण राजधानी रायपुर और आसपास के जिलों में अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से पूरी तरह राहत मिली है।
प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने भारी बारिश और वज्रपात को देखते हुए आम जनता और स्थानीय प्रशासन के लिए एडवाइजरी जारी की है:
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आकाशीय बिजली से सुरक्षा: कड़क के साथ बारिश होने की स्थिति में खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े न हों।
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जलभराव और नदी-नाले: निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। उफान मारते नदी-नालों या जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं।
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किसानों को सलाह: खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें और कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव बारिश थमने के बाद ही करें।