नर्सिंग छात्रों की समस्याओं को लेकर स्वास्थ्य नर्सिंग संगठन का प्रदर्शन, पंजीयन और निजी कॉलेजों की जांच की मांग
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य नर्सिंग संगठन ने नर्सिंग शिक्षा और पंजीयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल की रजिस्ट्रार लक्ष्मी साहू को 10 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अजय त्रिपाठी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने नर्सिंग छात्रों और अभ्यर्थियों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की।
संगठन का आरोप है कि नर्सिंग पाठ्यक्रम पूरा करने वाले छात्रों को पंजीयन प्रमाणपत्र प्राप्त करने में छह से सात महीने तक का समय लग रहा है। इसके कारण कई अभ्यर्थी राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न भर्तियों में आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं। संगठन ने पंजीयन प्रक्रिया में तेजी लाने और निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी आवेदनों का निराकरण करने की मांग की है।
मांगपत्र में नर्सिंग पंजीयन नवीनीकरण की प्रक्रिया को 15 दिनों के भीतर पूरा करने तथा संपूर्ण पंजीयन व्यवस्था को ऑनलाइन करने की मांग भी शामिल है। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिलेगी।
स्वास्थ्य नर्सिंग संगठन ने वर्ष 2025 के कई छात्रों को अब तक अंकसूची नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि समय पर मार्कशीट नहीं मिलने के कारण विद्यार्थियों की पंजीयन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने लंबित मार्कशीट जल्द जारी करने की मांग की है।
निजी नर्सिंग कॉलेजों पर गंभीर आरोप
संगठन ने कई निजी नर्सिंग कॉलेजों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया है कि कुछ संस्थानों में बीएससी नर्सिंग और एमएससी नर्सिंग पाठ्यक्रमों में नियमित उपस्थिति के बिना प्रवेश और अध्ययन की व्यवस्था की जा रही है, जिससे नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
मांगपत्र में भारतीय नर्सिंग परिषद (प्छब्) के नियमों के अनुरूप सभी निजी नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों की बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि इससे निरीक्षण के दौरान केवल दस्तावेजों के आधार पर स्टाफ दिखाने जैसी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सकेगी।
संगठन ने यह भी दावा किया है कि प्रदेश में 40 से 50 ऐसे नर्सिंग कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जिन्हें भारतीय नर्सिंग परिषद से मान्यता प्राप्त नहीं है। इसके बावजूद उन्हें विभिन्न स्तरों पर मान्यता प्रदान कर छात्रों के भविष्य को जोखिम में डाला जा रहा है। ऐसे संस्थानों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई और गैर-मान्यता प्राप्त कॉलेजों को बंद करने की मांग की गई है।
शुल्क व अनियमितताओं की जांच की मांग
मांगपत्र में निजी नर्सिंग कॉलेजों द्वारा स्टेशनरी और ड्रेस के नाम पर छात्रों से 6 से 7 हजार रुपये तक अतिरिक्त शुल्क वसूलने के आरोपों की जांच की मांग भी की गई है।
इसके अलावा संगठन ने नर्सिंग काउंसिल के पूर्व अधिकारियों, निरीक्षण समितियों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार पाया जाए तो कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।
प्रदेश स्वास्थ्य नर्सिंग संगठन ने कहा है कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने, छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने और पंजीयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए संबंधित विभागों को जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए।

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