कौन हैं राजेश मेहता? जिनपर सेबी ने लगाया कंपनी का पैसा निजी ट्रेडिंग में उड़ाने का आरोप, जानिए ज्वेलरी किंग के अर्श से फर्श की कहानी
नई दिल्ली। देश के जाने-माने गोल्ड और ज्वेलरी बिजनेस ग्रुप 'राजेश एक्सपोर्ट्स' और इसके चेयरमैन राजेश मेहता इस समय भारी कानूनी संकट में घिर गए हैं। पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने कंपनी और इसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ एक कड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। सेबी ने राजेश मेहता पर बड़े पैमाने पर वित्तीय हेरफेर और कॉर्पोरेट गवर्नेंस की विफलता का आरोप लगाते हुए उन्हें कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री और शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। इस चौंकाने वाली खबर के सामने आते ही शेयर बाजार में हड़कंप मच गया और राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में पांच फीसदी का लोअर सर्किट लग गया।
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय द्वारा जारी 109 पन्नों के इस अंतरिम आदेश में बेहद गंभीर और हैरान करने वाले खुलासे किए गए हैं। नियामक का अनुमान है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच अपनी विदेशी सहायक कंपनियों (Subsidiaries) के जरिए करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के टर्नओवर को बढ़ा-चढ़ाकर (इन्फ्लेटेड) पेश किया है, जो कि कंपनी के कुल घोषित राजस्व का लगभग 99.8 प्रतिशत है। सेबी ने अपनी जांच में पाया कि कंपनी के राजस्व का लगभग 97 से 99 फीसदी हिस्सा केवल कागजों पर दिखाया गया था और इसका कोई वास्तविक व्यावसायिक आधार या पुख्ता रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इस मामले की शुरुआत मार्च 2024 में एक शेयरधारक की शिकायत के बाद हुई थी, जिसने कंपनी के बही-खातों में लंबे समय से अटके बड़े बकाये (ट्रेड रिसीवेबल्स) पर सवाल उठाए थे।
आदेश में यह भी आरोप लगाया गया है कि राजेश मेहता ने अपने व्यक्तिगत डेरिवेटिव ट्रेडिंग के घाटे और लेनदेन को छिपाने के लिए कंपनी के फंड का इस्तेमाल किया। उन्होंने 'एफ्लुएंस शेयर्स एंड स्टॉक्स' नामक ब्रोकिंग फर्म के जरिए करोड़ों रुपये के अपने निजी सौदों को कंपनी की सेल और परचेज के रूप में दर्ज कर दिया, जबकि संबंधित ब्रोकर ने ऐसे किसी भी लेनदेन से साफ इनकार किया है। इसके अलावा, कंपनी के करोड़ों रुपये नियमों को ताक पर रखकर राजेश मेहता और सिद्धार्थ मेहता के व्यक्तिगत बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। सेबी ने इस पूरे मामले को भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास का एक अभूतपूर्व और बेहद गंभीर घोटाला बताया है। हालांकि, इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए राजेश एक्सपोर्ट्स ने कहा है कि यह केवल एक अंतरिम आदेश है और सेबी के साथ बातचीत में किसी कम्युनिकेशन गैप के कारण ऐसा हुआ है। कंपनी ने दावा किया है कि उनके टर्नओवर के आंकड़े पूरी तरह सही हैं और वे जल्द ही सभी जरूरी दस्तावेज सौंपकर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे।

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