वाहन लूटकर चालक की हत्या मामले में बड़ा फैसला, 4 आरोपियों को उम्रकैद, एक को 1 साल की सजा, एक बरी
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। वाहन लूटकर चालक की हत्या के सनसनीखेज मामले में द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (पेंड्रारोड) ज्योति अग्रवाल की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने चार मुख्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, लूटी गई बोलेरो अपने कब्जे में रखने के दोषी एक आरोपी को एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी गई, जबकि साक्ष्यों के अभाव में एक अन्य आरोपी को बरी कर दिया गया।
अभियोजन के अनुसार, सितंबर 2022 में आरोपियों ने बोलेरो वाहन लूटने और चालक नंदू काशीपुरी की हत्या करने की साजिश रची थी। 6 सितंबर 2022 को ग्राम कुदरी (थाना गौरेला) के पास नंदू काशीपुरी का अपहरण किया गया। इसके बाद आरोपी रामाशंकर सोनी और लालू चौधरी ने मृतक को पकड़कर रखा, जबकि रोहित यादव ने मोटरसाइकिल के क्लच वायर से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।
हत्या के बाद आरोपियों ने मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश करते हुए शव को मध्यप्रदेश के बिजुरी रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया। इसके अलावा, लूटी गई बोलेरो (CG-10 AF-0772) की असली नंबर प्लेट हटाकर उस पर फर्जी नंबर प्लेट (MP-65 BB-0645) लगाई गई और वाहन को बेचने की नीयत से छिपा दिया गया।
चार आरोपियों को उम्रकैद
अदालत ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, फिंगरप्रिंट रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर रामाशंकर सोनी, रोहित यादव, लालू चौधरी और सावित्री को दोषी ठहराया। चारों को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं (पूर्व आईपीसी की धारा 120बी/34 एवं 302/34) के तहत आजीवन कारावास और 5-5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। इसके अलावा लूट से संबंधित अपराध में 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भी दी गई।
साक्ष्य मिटाने पर अतिरिक्त सजा
न्यायालय ने रामाशंकर सोनी, रोहित यादव और लालू चौधरी को साक्ष्य नष्ट करने का दोषी भी पाया। इस अपराध के लिए तीनों को 7-7 वर्ष के अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।
बोलेरो छिपाने वाले को एक साल की सजा
लूटी गई बोलेरो अपने कब्जे में रखने के मामले में आरोपी उमाकांत उपाध्याय को दोषी ठहराते हुए अदालत ने एक वर्ष के सश्रम कारावास और 1,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
एक आरोपी को मिली राहत
मामले में आरोपी हेमराज सिंह के खिलाफ पर्याप्त प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य साक्ष्य नहीं मिलने पर न्यायालय ने उन्हें दोषमुक्त (बरी) कर दिया।
पीड़ित परिवार को मिलेगा मुआवजा
अदालत ने अपने आदेश में सभी सजाएं साथ-साथ चलाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह माना कि नंदू काशीपुरी की मृत्यु अपराध का परिणाम थी। इसलिए उनके आश्रितों को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना, 2011 के तहत मुआवजा प्रदान करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर को अनुशंसा भेजी गई है।

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