रायपुर (चैनल इंडिया)। छत्तीसगढ़ में महिलाओं में नशा करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की हालिया रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों ने समाज और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले चार वर्षों में प्रदेश की महिलाओं में तंबाकू और शराब के सेवन में भारी इजाफा दर्ज किया गया है। शराब पीने के मामले में छत्तीसगढ़ की महिलाएं पूरे देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गई हैं।
आंकड़ों की तुलना करें तो छत्तीसगढ़ की महिलाएं नशा करने के मामले में अपने पड़ोसी राज्यों मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से काफी आगे हैं। मध्यप्रदेश में 1.0 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करती हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा पांच प्रतिशत (यानी हर 100 में से पांच महिलाएं) तक पहुंच चुका है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि महिलाओं में बढ़ते नशे के कारण ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर), बांझपन, हृदय रोग और असमय गर्भपात जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं इन खतरों से अनजान हैं।
बस्तर और सुकमा में हालात सबसे गंभीर
रिपोर्ट के मुताबिक, पारंपरिक और सामाजिक मान्यताओं के कारण आदिवासी बहुल क्षेत्रों में यह समस्या सबसे विकराल है। सुकमा जिले में स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां करीब 2.2 प्रतिशत महिलाएं शराब और 44 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रही हैं। बस्तर संभाग के अन्य जिलों में भी स्थानीय पेय (सल्फी, ताड़ी और महुआ) को सामाजिक रीति-रिवाजों का हिस्सा मानने के कारण महिलाओं में इसकी लत तेजी से फैल रही है।
मंजन के बहाने गुड़ाखू की लत
ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में महिलाओं द्वारा दांत साफ करने के नाम पर ‘गुड़ाखू’ (तंबाकू युक्त पेस्ट) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाएं इसे लत नहीं बल्कि एक आदत मानती हैं, जो धीरे-धीरे उनके शरीर को खोखला कर रहा है। इसके अलावा, दिनभर के कड़े शारीरिक श्रम और मानसिक तनाव को मिटाने के लिए भी मजदूरी करने वाली महिलाएं नशे का सहारा ले रही हैं।