रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में कुछ चेहरे ऐसे हैं जिन्होंने सरकारी सेवा से लेकर सत्ता के शीर्ष तक का सफर अपने दम पर तय किया है। बलौदाबाजार विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री टंकराम वर्मा का नाम भी ऐसे ही नेताओं में शामिल है। एक समय शासकीय शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाले टंकराम वर्मा आज राज्य के राजस्व और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
12 जून 1962 को रायपुर जिले के तुलसी नेवरा गांव में जन्मे टंकराम वर्मा के पिता सोनचंद वर्मा थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव और आसपास के विद्यालयों में हुई। उन्होंने वर्ष 1979 में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुमा से हायर सेकेंडरी परीक्षा उत्तीर्ण की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर का रुख किया। वर्ष 1982 में बीए, 1987 में एलएलबी, 1990 में राजनीति शास्त्र में एमए और 1992 में समाजशास्त्र में एमए की डिग्री हासिल की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने शासकीय शिक्षक के रूप में सेवा शुरू की और लंबे समय तक शिक्षा विभाग में कार्य किया।
शासकीय सेवा के दौरान टंकराम वर्मा को प्रतिनियुक्ति पर विभिन्न जनप्रतिनिधियों के साथ काम करने का अवसर मिला। वे करीब एक दशक तक पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश बैस के निजी सहायक (पीए) रहे। इसके बाद उन्होंने पूर्व मंत्री केदार कश्यप और दयालदास बघेल के साथ भी पीए के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्हें प्रशासन, राजनीति और जनसंपर्क का व्यापक अनुभव मिला, जिसने आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन की मजबूत नींव तैयार की।
टंकराम वर्मा का राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण है कि संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक सक्रियता और निरंतर जनसंपर्क किसी भी व्यक्ति को राजनीति के शीर्ष तक पहुंचा सकते हैं। एक शासकीय शिक्षक से लेकर मंत्री पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखी जाती है।
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने टंकराम वर्मा पर भरोसा जताते हुए उन्हें बलौदाबाजार विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। राजनीति के बड़े चेहरों के बीच पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे वर्मा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शैलेष नितिन त्रिवेदी को 14,746 मतों के अंतर से हराकर सभी को चौंका दिया। विश्लेषकों के अनुसार भाजपा के मजबूत संगठन, कुर्मी समाज के समर्थन और विपक्ष की आंतरिक गुटबाजी का लाभ उन्हें मिला। साथ ही पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा के भाजपा में शामिल होने से भी चुनावी समीकरण उनके पक्ष में मजबूत हुए।
सामाजिक गतिविधियों से बनाई अलग पहचान
टंकराम वर्मा केवल सरकारी कर्मचारी या राजनीतिक कार्यकर्ता ही नहीं रहे, बल्कि सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। वर्ष 1993 से वे सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रामायण और श्रीमद्भागवत कथा जैसे धार्मिक आयोजनों के लिए भी उनकी विशेष पहचान रही है। वर्ष 2017 में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उसी वर्ष वे तिल्दा क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए और बाद में जिला पंचायत उपाध्यक्ष भी बने। भाजपा संगठन में भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं और वे ग्रामीण भाजपा जिला अध्यक्ष के रूप में सक्रिय रहे।