45 निकायों में बनेंगे शौचालय, एस्पिरेशनल टॉयलेट विद यूरिनल

45 निकायों में बनेंगे शौचालय, एस्पिरेशनल टॉयलेट विद यूरिनल
रायपुर (चैनल इंडिया)। राज्य में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत अब सार्वजनिक शौचालयों का नया मॉडल विकसित किया जाएगा। राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने 45 नगरीय निकायों में आकांक्षीय शौचालय एस्पिरेशनल टॉयलेट विद यूरिनल निर्माण के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन शौचालयों में केवल साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडर समुदाय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। 
राज्य सरकार ने इसके लिए स्वीकृत यानी कार्ययोजना जारी कर दी है। जिन निकायों में निर्माण प्रस्तावित है उनमें अंबिकापुर, भिलाई, बीरगांव, दुर्ग, राजनांदगांव, रिसाली, बेमेतरा, जशपुरनगर, तमनार, बड़ीकरेली, सक्ती, सारंगढ़, बांकी मोंगरा, गौरेला, डोंगरगढ़, बम्हनीडीह, बरेला, भटगांव (सारंगढ़), भिंभौरी, विश्रामपुर, चिखलाकसा, डभरा, दाढी, देवभोग, गीदम, घुमका, इंदौरी, जनकपुर, जरहागांव, कोपरा, कुसमी (बलरामपुर), कुसमी (बेमेतरा), लखनपुर, लालबहादुर नगर, मरवाही, नरियरा, पलारी (बालोद), पामगढ़, परपोड़ी, पटना, पवनी, रोहांसी, सहसपुरलोहारा, सरसींवा और शिवनंदनपुर शामिल हैं।
दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि ऐसे स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां लोगों की आवाजाही अधिक रहती है या खुले में शौच और पेशाब की समस्या बनी हुई है। इसके तहत बाजार, बस स्टैंड, पर्यटन स्थल, धार्मिक स्थल, पेट्रोल पंप और सार्वजनिक उपयोग वाले अन्य स्थानों पर इन टॉयलेट्स का निर्माण किया जाएगा। सरकार का मानना है कि बेहतर सार्वजनिक शौचालय व्यवस्था से शहरों में स्वच्छता की स्थिति सुधरेगी और खुले में पेशाब व शौच की समस्या कम होगी।
महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष सुविधाएं
एस्पिरेशनल टॉयलेट्स को सामान्य सार्वजनिक शौचालयों से अलग और अधिक सुविधायुक्त बनाया जाएगा। महिलाओं के लिए सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और इस्तेमाल किए गए नैपकिन के निपटान के लिए इंसीनरेटर लगाए जाएंगे। बच्चों के लिए कम ऊंचाई वाले बेसिन और सीट, दिव्यांगजनों के लिए बैरियर-फ्री प्रवेश और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए  हैं। इसके अलावा पर्याप्त रोशनी, वेंटिलेशन, हरियाली और हाथ सुखाने की व्यवस्था भी की जाएगी।