हारी सीटों पर निगम-मंडल अध्यक्षों को जिम्मेदारी, मिशन 2028: भाजपा की ढाई साल पहले से तैयारी शुरू

हारी सीटों पर निगम-मंडल अध्यक्षों को जिम्मेदारी, मिशन 2028: भाजपा की ढाई साल पहले से तैयारी शुरू
रायपुर (चैनल इंडिया)। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव नवंबर 2028 में होने हैं, लेकिन अभी से भाजपा चुनावी मोड में आ चुकी है। 2023 विधानसभा में भाजपा 36 सीटें हारी थी। इसमें 35 कांग्रेस और एक गोंगपा ने जीती थी। अब इन 36 सीटों को कैसे जीता जाए, इसकी रणनीति बनाने के लिए हर विधानसभा में एक-एक प्रभारी नियुक्त कर दिया गया है।
ये सभी निगम-मंडल-आयोग के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष हैं। सभी प्रभारियों को महीने में सात दिन इन विधानसभा में गुजारना अनिवार्य है। ढाई साल में उन्हें एक-एक घर तक पहुंचना है और जीत की पूरी प्लानिंग तैयार करनी है। जिला अध्यक्ष से लेकर बूथ प्रभारी तक में यह संदेश है कि इन प्रभारियों की हर बात को सुना जाए और अमल किया जाए। छत्तीसगढ़ की राजनीति के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब ढाई साल पहले विधानसभाओं की कमान नेताओं को सौंप दी गई हो।
पाटन, कोंटा, भिलाई नगर, बीजापुर, पामगढ़ जैसी सीटें जहां भाजपा लगातार दो बार से हार रही है, वहां भाजपा ने 2028 में जीतने का लक्ष्य रखा है। 36 में 80 प्रतिशत सीटों को जीतने का जिम्मा इन प्रभारियों को सौंपा गया है। जिले में नियुक्ति नहीं दी गई है यानी अगर कोई अध्यक्ष कहीं से टिकट का दावेदार है तो उसे उल्टी दिशा की विधानसभा का प्रभारी बनाया गया है। इन प्रभारियों को हर तीन महीने में अपनी रिपोर्ट क्षेत्रीय सह संगठन महामंत्री को सौंपनी है।
प्रभारियों ने विधानसभा के सभी बूथों को तीन भागों में बांट लिया है। रेड जोन बूथ: ऐसे बूथ जहां कभी भाजपा जीतती ही नहीं है। पिछली बार भी बड़ी संख्या से यहां भाजपा हारी थी। येलो जोन बूथ: ऐसे बूथ जहां कभी भाजपा जीतती है तो कभी हार जाती है। पिछली बार भी कम अंतर से यहां हारी थी। ग्रीन जोन बूथ: ऐसे बूथ जहां भाजपा हमेशा जीतती रही है।