प्रदेश में होम स्टे की राह आसान, अब नौ कमरे और 18 बिस्तर की होगी अनुमति

प्रदेश में होम स्टे की राह आसान, अब नौ कमरे और 18 बिस्तर की होगी अनुमति
रायपुर (चैनल इंडिया)। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के इरादे से लागू की गई होम स्टे नीति में अब महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार अब एक होम स्टे इकाई में न्यूनतम एक कमरे से लेकर अधिकतम नौ कमरों और 18 बिस्तरों तक की अनुमति होगी। इससे संचालकों को अपनी क्षमता बढ़ाने और अधिक पर्यटकों को ठहराने का अवसर मिलेगा। 
राज्य सरकार ने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से होम स्टे नीति 2025-30 में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं।  सरकार का मानना है कि नए बदलावों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की पर्यटन गतिविधियों में भागीदारी बढ़ेगी तथा राज्य में वैकल्पिक आवास सुविधाओं का विस्तार होगा। संशोधित नीति का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान पंजीकरण की वैधता से जुड़ा है। पहले होम स्टे का पंजीकरण तीन वर्ष के लिए मान्य होता था, लेकिन अब इसे आजीवन वैधता प्रदान की गई है। 
जगदलपुर और आसपास के दूरदराज के क्षेत्रों में पर्यटकों को स्थानीय आदिवासी संस्कृति, कला और ग्रामीण जीवनशैली का अनुभव कराने के लिए यह योजना लागू है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध सरगुजा क्षेत्र में होमस्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है। जशपुर जिले में पर्यटन को विकसित करने के लिए ‘होमस्टेज ऑफ इंडिया के सहयोग से विशेष समझौते किए गए हैं, जिसके तहत ग्राम केरे को आदर्श होमस्टे ग्राम बनाया गया है। मैनपाट ‘मिनी तिब्बत’ के रूप में मशहूर मैनपाट में स्थानीय निवासियों को होमस्टे के लिए घर बनाने व कमरों के निर्माण हेतु राज्य सरकार द्वारा अनुदान व वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है।
संशोधित नीति के तहत होम स्टे संचालकों को अब पुलिस प्राधिकरण से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे पंजीकरण प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा और नए उद्यमियों के लिए व्यवसाय शुरू करना आसान हो सकेगा। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यह बदलाव लंबे समय से लंबित मांगों में शामिल था।