नितेश पाटकर के नवगीत संग्रह 'सबके भीतर एक कहानी' का हुआ विमोचन
पाटकर के नवगीतों में संवेदना और नए चिंतन की साफ अभिव्यक्ति : डॉ. अजय पाठक
नितेश के नवगीतों में चिंतन की एक नई धारा : डॉ. देवधर महंत
बिलासपुर। शहर के युवा नवगीतकार नितेश पाटकर के प्रथम नवगीत संग्रह 'सबके भीतर एक कहानी' का विमोचन समारोह साहित्यिक गरिमा और विचारपूर्ण विमर्श के साथ आयोजित हुआ। बिलासपुर के एक निजी होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य जगत के वरिष्ठ साहित्यकारों ने नवगीत की परंपरा, उसकी समकालीन प्रासंगिकता और नितेश पाटकर की रचनात्मक दृष्टि पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देश के ख्यातिलब्ध गीत कवि डॉ. अजय पाठक ने कहा कि इस संसार में मनुष्य के रूप में जन्म लेना अपने आप में एक दुर्लभ घटना है। मनुष्य का शिक्षित होना इससे भी बड़ा सौभाग्य है और यदि शिक्षा के साथ किसी व्यक्ति में कविता की चेतना और सृजन की शक्ति विकसित हो जाए तो यह अत्यंत दुर्लभ उपलब्धि होती है। उन्होंने कहा कि कवि केवल शब्दों का रचनाकार नहीं होता, बल्कि वह समाज की चेतना को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। डॉ. पाठक ने कहा कि कवि हमेशा अपने समय की धड़कनों को महसूस करता है। वह समाज की पीड़ा, संघर्ष, उम्मीद और परिवर्तन की आकांक्षाओं को अपनी रचनाओं में स्थान देता है। उसकी रचना व्यक्ति से आगे बढ़कर सामूहिक जीवन का दस्तावेज बन जाती है। उन्होंने कहा कि नितेश पाटकर की रचनाओं में भी समाज और मनुष्य के प्रति यही संवेदनशील दृष्टि दिखाई देती है।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. देवधर महंत ने कहा कि नवगीत बदलते समाज और बदलते जीवन मूल्यों को समझने तथा अभिव्यक्त करने की विधा है। नितेश पाटकर के नवगीतों में चिंतन की एक नई धारा दिखाई देती है। उनके गीत केवल भावनाओं तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सामाजिक संरचना, आम आदमी के जीवन और वर्तमान परिस्थितियों के प्रति एक सजग दृष्टि प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि सामान्य तौर पर लोग कविता लिखना पसंद करते हैं, क्योंकि कविता के माध्यम से विचारों को अभिव्यक्त करना अपेक्षाकृत सहज होता है, लेकिन गीत लिखना अपने आप में कठिन साधना है। नवगीत लिखना उससे भी अधिक चुनौतीपूर्ण कार्य है, क्योंकि इसमें रचनाकार को एक निश्चित संरचना और लय के भीतर रहते हुए नवीन विचार और नए अनुभवों को प्रस्तुत करना पड़ता है। नितेश ने अपने संग्रह में विभिन्न विषयों और संवेदनाओं को समेटते हुए नवगीत की संभावनाओं को विस्तार देने का प्रयास किया है।
नवगीत संग्रह पर चर्चा करते हुए विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गंगाधर पटेल ने कहा कि नितेश पाटकर के नवगीत जीवन के वास्तविक अनुभवों से जुड़े हुए हैं। उनकी रचनाएं कल्पना के स्तर पर नहीं रुकतीं, बल्कि यथार्थ की जमीन पर उतरकर मनुष्य और समाज के रिश्तों को समझने का प्रयास करती हैं। उनके नवगीतों में युवा विचारों की ऊर्जा, वर्तमान समय को देखने की दृष्टि और सामाजिक सरोकारों की स्पष्ट उपस्थिति दिखाई देती है। डॉ. पटेल ने कहा कि नितेश के गीतों में जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों से लेकर व्यापक सामाजिक प्रश्नों तक को स्थान मिला है।
वरिष्ठ गीतकार बुधराम यादव ने कहा कि नितेश पाटकर के नवगीतों में व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर तीखा लेकिन संवेदनशील कटाक्ष दिखाई देता है। उनकी रचनाएं व्यवस्था के प्रति असंतोष को केवल व्यक्त नहीं करतीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और न्याय के पक्ष में खड़े होने की भावना भी पैदा करती हैं। उन्होंने कहा कि युवा रचनाकारों में जब ऐसी संवेदनशीलता और सामाजिक दृष्टि विकसित होती है तो साहित्य समृद्ध होता है। इन संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए साहित्य समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह नए रचनाकारों को प्रोत्साहन दे।
समारोह में रचनाकार नितेश पाटकर ने अपनी रचनाधर्मिता पर बात रखते हुए कहा कि साहित्य में बहुत कुछ लिखा जा चुका है, ऐसे में नया लिखना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। लेकिन इससे भी बड़ी चुनौती है निरंतर पढ़ते रहना, अपने समय और समाज को गहराई से समझना। उन्होंने कहा कि लगातार अध्ययन, सामाजिक दृष्टिकोण और जीवन के अनुभवों से ही रचना में नई दृष्टि और सार्थकता आती है। रचनाकार का दायित्व केवल शब्दों को सजाना नहीं, बल्कि अपने समय की संवेदनाओं, प्रश्नों और संघर्षों को ईमानदारी से अभिव्यक्त करना भी है।
कार्यक्रम का संचालन सुनील शर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन करते हुए सनत तिवारी ने आयोजन में उपस्थित सभी साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर अरपा साहित्य समिति के अध्यक्ष राजकुमार द्विवेदी ‘बिम्ब’, केवल कृष्ण पाठक, एन.के. शुक्ला, राघवेंद्र धर दीवान, डॉ. सुधाकर बिबे, महेश श्रीवास, महेंद्र साहू, मोहन पाटकर, रामेश्वर गुप्ता, रमणा किरण, सुनील चिपड़े, राजेश कुमार, कुमार पांडेय, सुमित शर्मा, बालमुकुंद श्रीवास, रितेश पाटकर, डॉ. सुनीता मिश्रा, सुषमा पाठक, सुप्रिया भारतीयन, रीता पाठक, कमलेश पाठक, सरोज पाटकर, रक्षा नामदेव, डॉ. चंपा मजूमदार, रेणु बाजपेयी, श्रुति नामदेव, सुनीता वर्मा, रश्मि गुप्ता सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, लेखक और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

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