नव्या मलिक एमडीएमए ड्रग्स केस की जांच अब एसआईटी के हवाले, हाईप्रोफाइल ड्रग नेटवर्क की होगी गहन पड़ताल
रायपुर। चर्चित नव्या मलिक एमडीएमए ड्रग्स मामले की जांच को नया मोड़ देते हुए पुलिस विभाग ने इसे विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दिया है। मामले की गंभीरता और इसके कथित अंतरराज्यीय तथा हाईप्रोफाइल कनेक्शन को देखते हुए पांच सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। टीम में एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), क्राइम ब्रांच प्रभारी, गंज थाना प्रभारी समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं। एसआईटी अब ड्रग्स तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क, आर्थिक लेन-देन और संभावित संरक्षणकर्ताओं की भूमिका की विस्तृत जांच करेगी।
यह मामला 23 अगस्त 2025 को सामने आया था, जब एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा गंज थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने देवेंद्र नगर ओवरब्रिज के पास एक कार से एमडीएमए ड्रग्स बरामद की थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने हर्ष आहूजा, मोनू विश्नोई और दीप धनोरिया को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के कब्जे से 27.58 ग्राम एमडीएमए, एक कार, नगद राशि और मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। मामले में एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
प्रारंभिक जांच और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने बाद में मुंबई से नव्या मलिक को गिरफ्तार किया था। जांच में आरोप सामने आया था कि नव्या मलिक रायपुर में आयोजित हाईप्रोफाइल पार्टियों, निजी आयोजनों और नाइट क्लबों में एमडीएमए की सप्लाई से जुड़ी हुई थी। पुलिस का दावा है कि कई आयोजनों में वह स्वयं मौजूद रहकर ड्रग्स उपलब्ध कराती थी।
पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, पूरा नेटवर्क मोबाइल फोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि ड्रग्स की आपूर्ति विभिन्न लोगों तक पहुंचाई जाती थी और इसके लिए ऑनलाइन तथा नकद दोनों माध्यमों से भुगतान किए जाने के संकेत मिले हैं।
एसआईटी की जांच दो चरणों में की जाएगी। पहले चरण में एमडीएमए के स्रोत, सप्लाई नेटवर्क, आरोपियों की भूमिका, मनी ट्रेल और कथित हाईप्रोफाइल पार्टियों से जुड़े कनेक्शन की जांच होगी। वहीं दूसरे चरण में अंतरराज्यीय नेटवर्क, डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण, संरक्षण और मिलीभगत के आरोपों के साथ-साथ ड्रग्स खरीदने वाले उपभोक्ताओं की पहचान पर फोकस किया जाएगा।
जांच के दौरान एसआईटी मोबाइल फोन, लैपटॉप, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण करेगी। इसके अलावा बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजेक्शन और नकद लेन-देन की भी जांच की जाएगी, ताकि ड्रग कारोबार से जुड़े आर्थिक नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
पुलिस यह भी जांच करेगी कि क्या इस नेटवर्क के तार अन्य राज्यों या पुराने एनडीपीएस मामलों से जुड़े हुए हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति, कारोबारी या अन्य व्यक्तियों द्वारा इस नेटवर्क को संरक्षण या आर्थिक सहायता तो नहीं दी गई थी।
इधर, इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कथित अवैध कमाई और मनी ट्रेल की अलग से जांच कर रहा है। ऐसे में यह मामला अब केवल ड्रग्स बरामदगी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठित अपराध और आर्थिक अपराध से जुड़े पहलुओं की भी व्यापक जांच के दायरे में आ गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी की जांच के आधार पर आने वाले दिनों में मामले में नए खुलासे और अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

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