नई दिल्ली: 22 अगस्त 2026 (शनिवार) का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। शनिवार का दिन कर्मफलदाता और न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित होता है। आज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। शनिवार के दिन शनिदेव और हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से शनि दोष, ढैय्या व साढ़ेसाती के दुष्प्रभावों से राहत मिलती है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले पंचांग के माध्यम से शुभ मुहूर्त और राहुकाल का विचार जरूर करना चाहिए।
| पंचांग अंग |
विवरण |
| दिनांक |
22 अगस्त 2026 |
| वार (दिन) |
शनिवार |
| माह |
भाद्रपद |
| पक्ष |
शुक्ल पक्ष |
| तिथि |
दशमी तिथि |
| नक्षत्र |
ज्येष्ठा (तत्पश्चात मूल) |
| योग |
प्रीति योग |
| करण |
गर तत्पश्चात वणिज |
सूर्योदय, चंद्रोदय और सूर्य-चंद्र राशि
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सूर्योदय: सुबह 05:54 बजे
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सूर्यास्त: शाम 06:53 बजे
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चंद्रोदय: दोपहर 02:02 बजे
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चंद्रास्त: रात 01:03 बजे (23 अगस्त)
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सूर्य राशि: सिंह राशि
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चंद्र राशि: वृश्चिक राशि (सायंकाल के बाद धनु राशि)
शुभ एवं अशुभ समय
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अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 11:58 बजे से 12:49 बजे तक (किसी भी नए काम की शुरुआत या निवेश के लिए सर्वोत्तम)
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अमृत काल: शाम 04:15 बजे से 05:48 बजे तक
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राहुकाल (अशुभ समय): सुबह 09:09 बजे से 10:46 बजे तक (इस समय कोई भी मांगलिक कार्य या महत्वपूर्ण यात्रा न करें)
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दिशाशूल: पूर्व दिशा (यदि पूर्व दिशा की ओर यात्रा अनिवार्य हो तो उड़द की दाल, अदरक या तिल खाकर ही घर से निकलें)
आज के विशेष उपाय
शनिवार के दिन संध्याकाल में पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। शनि मंदिर में सरसों का तेल, काले तिल और नीले फूल अर्पित करें। इसके साथ ही 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें या सुंदरकांड/हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है।