छह महीने में पैसा डबल करने का झांसा, 500 करोड़ की ठगी का खुलासा; 8 आरोपी गिरफ्तार, 122 जमीनों की रजिस्ट्री बरामद

छह महीने में पैसा डबल करने का झांसा, 500 करोड़ की ठगी का खुलासा; 8 आरोपी गिरफ्तार, 122 जमीनों की रजिस्ट्री बरामद

मानपुर। छह से नौ महीने में निवेश की रकम दोगुनी करने का लालच देकर आम लोगों से लेकर नेताओं, सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों तक को कथित तौर पर ठगी का शिकार बनाने वाले बड़े नेटवर्क का बालाघाट पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क का दायरा मध्य प्रदेश के बालाघाट-लांजी से महाराष्ट्र के गोंदिया और चंद्रपुर होते हुए छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर और राजनांदगांव तक फैला था। पूरे मामले में करीब 500 करोड़ रुपए की ठगी का अनुमान लगाया जा रहा है।

मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ और उनके ठिकानों पर कार्रवाई के दौरान करोड़ों रुपए की संपत्ति और निवेश से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं।


चार साल से फरार मुख्य आरोपी समेत 8 गिरफ्तार

पुलिस ने 20 जुलाई को करीब चार साल से फरार बताए जा रहे मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकरायने के साथ तामेश मंसूरे, राकेश मंसूरे, प्रदीप कंकरायने, दिनेश कंकरायने, रामप्रसाद मंसूरे, प्रद्युमन कंकरायने और रूखचंद हरदे को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपियों के खिलाफ 63 से अधिक मामले दर्ज हैं और उनसे पूछताछ जारी है।

एसआईटी प्रमुख एवं सीएसपी मयंक तिवारी के मुताबिक, प्रद्युमन कंकरायने, रामप्रसाद मंसूरे और दिनेश कंकरायने के ठिकानों से 122 जमीनों की रजिस्ट्रियां मिली हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 18.61 करोड़ रुपए बताई गई है। इसके अलावा 14.82 करोड़ रुपए के 617 चेक भी जांच के दौरान बरामद किए गए हैं।

कार्रवाई में 20 रजिस्टर, भूमि ऋण पुस्तिकाएं, पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े दस्तावेज, करीब 1500 कोरे चेक, 59 बैंक इंस्टा किट और टैक्स व जीएसटी रिटर्न से संबंधित दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।


निवेशकों को रकम लौटाने की तैयारी

बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा के अनुसार, जब्त रजिस्टरों में दर्ज निवेशकों की पहचान की जाएगी और उनकी सुनवाई के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत रकम वापस दिलाने की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस जल्द ही इसके लिए प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।


2016-17 से चल रहा था कथित डबल मनी नेटवर्क

जांच में सामने आया है कि लांजी क्षेत्र से संचालित नेटवर्क ने वर्ष 2016-17 के आसपास मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के लोगों को छह से नौ महीने में रकम दोगुनी करने का लालच देकर निवेश कराना शुरू किया था। बाद में यह नेटवर्क तेजी से फैलता चला गया।

इस नेटवर्क के तार छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर और राजनांदगांव से भी जुड़े बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अकेले मोहला-मानपुर क्षेत्र के निवेशकों के करीब 10 करोड़ रुपए इस कथित योजना में फंसे हुए हैं। अब यहां के निवेशकों की नजर एसआईटी की जांच और रकम वापसी की प्रक्रिया पर है।


रियल एस्टेट से शुरू हुआ सफर, फिर लोगों से जुटाया निवेश

जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकरायने ने शुरुआत में अनाज कारोबार किया और बाद में रियल एस्टेट से जुड़ा। बताया जा रहा है कि निवेश से फायदा मिलने के बाद उसने पहले अपने रिश्तेदारों को अधिक रिटर्न देकर विश्वास बनाया। इसके बाद दूसरे लोग भी उससे जुड़ते चले गए। पुलिस जांच के मुताबिक, 2017 में शुरू हुआ कथित निवेश नेटवर्क 2019 तक 70 करोड़ रुपए से अधिक तक पहुंच गया था।


गिरफ्तारी से बचने के लिए धार्मिक स्थलों पर घूमता रहा आरोपी

पुलिस के मुताबिक, फरारी के दौरान सोमेंद्र गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर घूमता रहा। इस बीच उसकी करोड़ों रुपए की संपत्तियों को सीज किया गया और जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगाई गई।

जांच के दौरान पुलिस ने रणनीति के तहत एक जमीन की रजिस्ट्री की अनुमति दी। इसके बाद आरोपियों के बीच टेलीग्राम के माध्यम से कथित बातचीत और लेन-देन शुरू हुआ, जिससे पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिला और आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली।


खुद को बताता था हार्वर्ड से MBA

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि सोमेंद्र 12वीं पास और कॉलेज ड्रॉपआउट होने के बावजूद कथित तौर पर खुद को हार्वर्ड से MBA बताता था। लोगों के बीच अपनी आर्थिक और कारोबारी छवि मजबूत करने के लिए वह लग्जरी गाड़ियों, सेलिब्रिटीज से मुलाकात और विदेशों में प्रॉपर्टी निवेश जैसे दावे करता था।

वह सोशल मीडिया के जरिए विदेशी यात्राओं का दावा कर निवेशकों का भरोसा हासिल करने की कोशिश करता था। पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया कि उसके पास पासपोर्ट तक नहीं था। फिलहाल एसआईटी पूरे वित्तीय नेटवर्क, निवेशकों की संख्या, संपत्तियों और रकम के लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है।