मीडिया में नहीं फील्ड पर एक्टिव रहें, जीत के उत्साह में डूबिए मत
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री शिवप्रकाश की नेताओं को खरी-खरी
रायपुर । भाजपा के प्रदेश मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में दो दिनों तक चली बीजेपी की मैराथन बैठकों में मंच पर जितनी औपचारिक बातें हुईं, उससे कहीं ज्यादा चर्चा बंद कमरों में हुई।
बैठक के दौरान सबसे ज्यादा जिस बयान की चर्चा रही, वह पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश का था। उन्होंने नेताओं और पदाधिकारियों को साफ कहा कि पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों में मिले ‘विजय के उत्साह में डूब मत जाइए, अब संगठन को और ज्यादा मेहनत करनी है।’ बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल चुनाव की जीत का जिक्र कई बार हुआ। नेताओं ने इसे संगठनात्मक मॉडल की सफलता बताया। चर्चा यह रही कि जिस तरह पश्चिम बंगाल में बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत किया गया, उसी मॉडल को अब छत्तीसगढ़ में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में लागू किया जाएगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कई जिलों से आए पदाधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि सिर्फ सोशल मीडिया और बयानबाजी से संगठन मजबूत नहीं होगा। बूथ स्तर पर नियमित संपर्क, कार्यकर्ता बैठक और फील्ड एक्टिविटी बढ़ानी होगी।
संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने पश्चिम बंगाल की जीत को सिर्फ चुनावी सफलता नहीं बल्कि वैचारिक जीत बताया। कहा कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामाप्रसाद मुखर्जी की कर्मभूमि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत पार्टी की विचारधारा की जीत है। बैठक में बार-बार एक ही बात दोहराई गई कि संगठन अब लगातार चुनावी मोड में रहेगा। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी अब पंचायत और निकाय चुनावों पर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं। यही वजह है कि प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में एक नया संगठनात्मक कैलेंडर तय किया गया।
पार्टी का मानना है कि लगातार समीक्षा और जमीनी फीडबैक के जरिए संगठन को एक्टिव रखा जा सकता है। बैठक में मौजूद नेताओं के मुताबिक, इस बार सिर्फ भाषण नहीं हुए, बल्कि हर स्तर के पदाधिकारियों को ‘माइक्रो मॉनिटरिंग’ का संदेश दिया गया। बैठक के दौरान भी कई नेताओं के बीच यही चर्चा रही कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के बाद छत्तीसगढ़ संगठन में भी नए समीकरण दिखाई दे सकते हैं। पार्टी के अंदरखाने यह माना जा रहा है कि जून तक नए प्रभारी को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।
बैठकों के बाद बीजेपी के अंदर सबसे बड़ा संदेश यही माना जा रहा है कि पार्टी अब सिर्फ सत्ता चलाने के बजाय संगठन को लगातार एक्टिव रखने की रणनीति पर काम कर रही है। शिवप्रकाश का ‘विजय के उत्साह में मत डूबिए’ वाला संदेश भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व यह संकेत देना चाहता है कि बंगाल और दूसरे राज्यों की जीत के बाद भी संगठन को ढील नहीं दी जाएगी।

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