रायपुर: राज्य में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार के 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (I4C) की तर्ज पर राज्य स्तरीय 'छत्तीसगढ़ साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' की स्थापना की है। साइबर अपराधों के त्वरित निस्तारण और अंतर-एजेंसी समन्वय के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इसकी कमान सौंपी गई है।+
वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई कमान
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आईजी प्रशांत अग्रवाल (IG Prashant Agrawal): वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और पुलिस महानिरीक्षक (IG) प्रशांत अग्रवाल को इस नवगठित सेंटर का प्रभार सौंपा गया है।
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डीआईजी जायसवाल (DIG Jaiswal): उप-पुलिस महानिरीक्षक (DIG) जायसवाल को सेंटर के प्रशासनिक, परिचालन और तकनीकी समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है।
सेंटर के मुख्य कार्य और उद्देश्य
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केंद्रीय एजेंसियों से सीधा समन्वय: यह केंद्र गृह मंत्रालय (MHA), I4C, CERT-In, वित्तीय संस्थानों (बैंक/पेमेंट गेटवे) और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ सीधा तालमेल बिठाकर काम करेगा।
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1930 हेल्पलाइन और फ्रॉड रिकवरी: नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और हेल्पलाइन नंबर 1930 पर आने वाली वित्तीय ठगी की शिकायतों पर रियल-टाइम एक्शन लेकर ठगे गए पैसे को होल्ड कराने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।
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जिलों को तकनीकी सहायता: राज्य के सभी जिलों के साइबर थानों और सेल्स को आधुनिक फॉरेंसिक टूल्स, डेटा एनालिसिस और इन्वेस्टिगेशन सपोर्ट मुहैया कराया जाएगा।
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डिजिटल अरेस्ट व नए ट्रेंड्स पर प्रहार: 'डिजिटल अरेस्ट', क्रिप्टो स्कैम और एआई (AI) आधारित फर्जीवाड़ों से निपटने के लिए विशेष एसओपी (SOP) तैयार की जाएगी तथा पुलिस बल को हाई-टेक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस सेंटर की शुरुआत से छत्तीसगढ़ में अंतरराज्यीय साइबर गिरोहों पर नकेल कसने और आम नागरिकों को साइबर ठगी से त्वरित राहत दिलाने में बड़ी मदद मिलेगी।