पंचांग 5 अगस्त : सावन कृष्ण अष्टमी का संयोग; जानें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल
नई दिल्ली: सनातन धर्म में किसी भी नए, धार्मिक या मांगलिक कार्य की शुरुआत से पहले दिन के पंचांग का अवलोकन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। 5 अगस्त (बुधवार) का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह सावन (श्रावण) मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश और बुद्धि के दाता बुध देव की आराधना के लिए समर्पित होता है।
पंचांग के माध्यम से तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ मुहूर्तों की सटीक जानकारी मिलती है, जिससे कार्यों में विघ्न नहीं आते। आइए जानते हैं 5 अगस्त का संपूर्ण पंचांग:
तिथि और संवत
-
तारीख: 5 अगस्त
-
दिन: बुधवार
-
मास: श्रावण (सावन)
-
पक्ष: कृष्ण पक्ष
-
तिथि: अष्टमी तिथि
-
विक्रम संवत: 2083
-
शक संवत: 1948
सूर्य और चंद्रमा का समय
-
सूर्योदय: प्रातः 05:45 बजे
-
सूर्यास्त: सायं 07:07 बजे
-
चंद्रोदय: मध्यरात्रि 01:35 बजे (6 अगस्त)
-
चंद्रास्त: दोपहर 01:45 बजे
-
चंद्र राशि: मेष राशि (दोपहर तक), तत्पश्चात वृषभ राशि
नक्षत्र, योग और करण
-
नक्षत्र: भरणी नक्षत्र, तत्पश्चात कृतिका नक्षत्र
-
योग: ध्रुव योग
-
करण: बालव करण, तत्पश्चात कौलव करण
शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
-
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:21 बजे से 05:03 बजे तक
-
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:41 बजे से 03:34 बजे तक
-
गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:07 बजे से 07:29 बजे तक
-
अमृत काल: सायं 05:15 बजे से 06:55 बजे तक
(विशेष नोट: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुधवार के दिन अभिजीत मुहूर्त मान्य नहीं होता है।)
अशुभ समय और राहुकाल (Inauspicious Timings)
-
राहुकाल: दोपहर 12:26 बजे से 02:07 बजे तक (इस समय के दौरान कोई भी नया कार्य, पूजा-पाठ का संकल्प या बड़ा वित्तीय सौदा करने से बचें)
-
यमगंड: प्रातः 07:25 बजे से 09:05 बजे तक
-
गुलिक काल: प्रातः 10:46 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक
-
दिशा शूल: उत्तर दिशा (बुधवार के दिन उत्तर दिशा की ओर यात्रा करने से परहेज करना चाहिए। यदि यात्रा अनिवार्य हो तो घर से तिल या धनिया खाकर प्रस्थान करें)
admin




