रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले और अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ED ने इस मामले में मुख्य आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने अभ्यर्थियों को CGPSC-2021 परीक्षा के लीक प्रश्नपत्र और चयन का भरोसा देकर 3 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली की थी।
5 ठिकानों पर छापेमारी और अहम दस्तावेज जब्त
धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए ED की टीमों ने रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर जिलों में स्थित 5 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान जांच एजेंसी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े कागजात और डिजिटल डिवाइस जब्त किए हैं। यह पूरी कार्रवाई EOW-ACB और CBI द्वारा तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी व अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल और पैसों का लेन-देन
ED की जांच में यह बात सामने आई है कि उत्कर्ष चंद्राकर ने अभ्यर्थियों को प्रभावित करने और उनसे पैसे ऐंठने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री के तत्कालीन निजी सहायक (PA) के.के. चंद्रावंशी और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में पदस्थ तत्कालीन OSD के नाम और पद के प्रभाव का इस्तेमाल किया था।
जांच के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने अभ्यर्थियों से नकद 3 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई, जिसमें से लगभग 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को दिए गए थे। निजी बिचौलियों के माध्यम से प्रश्नपत्र चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए, जिससे डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अनुचित लाभ देकर चयन कराया गया।
मामले से जुड़े मुख्य बिंदु
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मुख्य गिरफ्तारी: ED ने PMLA की धारा 19 के तहत आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया है।
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करोड़ों की वसूली: परीक्षा पत्र लीक कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी वसूली गई।
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डिजिटल व वित्तीय साक्ष्य जब्त: रेड के दौरान मोबाइल डेटा, बैंक स्टेटमेंट और प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए।
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जांच का दायरा व्यापक: ED इस मामले में संलिप्त अन्य बिचौलियों और लेन-देन के स्रोतों की गहन पड़ताल कर रही है।