शिक्षक से टेलीकॉम प्रोफेशनल और फिर उपमुख्यमंत्री : विजय शर्मा

शिक्षक से टेलीकॉम प्रोफेशनल और फिर उपमुख्यमंत्री : विजय शर्मा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा का राजनीतिक सफर संघर्ष, शिक्षा और जनसेवा का अनूठा उदाहरण है। कबीरधाम जिले के कवर्धा में 19 जुलाई 1973 को जन्मे विजय शर्मा आज प्रदेश की कानून-व्यवस्था, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कभी कॉलेज में अध्यापन करने वाले और निजी टेलीकॉम कंपनी में नौकरी करने वाले विजय शर्मा आज प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।
विजय शर्मा के पिता का नाम रतनलाल शर्मा है। उन्होंने वर्ष 1991 में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद शासकीय महाविद्यालय, कवर्धा से वर्ष 1994 में बीएससी (गणित) की डिग्री प्राप्त की। वर्ष 1996 में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से एमएससी (भौतिक विज्ञान) किया। इसके बाद उन्होंने पीजीडीसीए, डिप्लोमा इन इंग्लिश और वर्ष 2001 में भोज विश्वविद्यालय, भोपाल से मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन की डिग्री हासिल की। एमसीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद विजय शर्मा ने कुछ समय तक विभिन्न कॉलेजों में अध्यापन किया। बाद में उन्होंने एक पेजर सेवा कंपनी में नौकरी की। इसके बाद वे रिलायंस टेलीकॉम से जुड़े और लंबे समय तक ऑपरेटर के रूप में कार्य किया। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के समय भी वे रिलायंस टेलीकॉम के साथ कार्यरत थे।
नौकरी के साथ-साथ विजय शर्मा सामाजिक और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे। धीरे-धीरे उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के संगठन में अपनी मजबूत पहचान बनाई। वे कवर्धा जिला भाजपा अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य और बाद में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। संगठन में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाने के बाद उन्हें प्रदेश भाजपा का महामंत्री बनाया गया। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने विजय शर्मा को चर्चित कवर्धा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। यह सीट वर्ष 2021 के झंडा विवाद और सामुदायिक तनाव के बाद पूरे प्रदेश की सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो गई थी। भाजपा ने इस चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ हिंदुत्व को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया। प्रचार के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विजय शर्मा के समर्थन में कवर्धा में जनसभा की।
विजय शर्मा की राजनीतिक पहचान एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में रही है, जो जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को उठाते हैं। धान खरीदी, राशन कार्ड, बिजली व्यवस्था, ग्रामीण विकास और स्थानीय मुद्दों को लेकर वे लगातार सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कई बार अधिकारियों के समक्ष आम लोगों की समस्याएं उठाईं और जरूरत पडऩे पर धरना-प्रदर्शन का भी नेतृत्व किया। राजनीतिक जीवन में विजय शर्मा कई जनआंदोलनों का हिस्सा रहे। विभिन्न आंदोलनों के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा। समर्थकों का मानना है कि उनकी जमीनी कार्यशैली, संगठनात्मक अनुभव और जनता से सीधा जुड़ाव ही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत है।