₹3100 तक पहुंचे दाम, फिर भी भारतीय दर्शकों को नहीं मिलेगा 'असली' IMAX का अनुभव; जानें क्यों

₹3100 तक पहुंचे दाम, फिर भी भारतीय दर्शकों को नहीं मिलेगा 'असली' IMAX का अनुभव; जानें क्यों

एंटरटेनमेंट डेस्क: हॉलीवुड की आगामी ब्लॉकबस्टर और बहुप्रतीक्षित फिल्म 'The Odyssey' को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है। विशेष रूप से सिनेमा प्रेमी इस भव्य फिल्म को बड़े पर्दे यानी IMAX (आईमैक्स) फॉर्मेट में देखने के लिए बेताब हैं। इस दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत के प्रमुख महानगरों में इस फिल्म के आईमैक्स टिकटों की कीमतें ₹3100 तक पहुंच चुकी हैं।

भारी-भरकम कीमत चुकाने के बावजूद, भारतीय सिनेमा प्रेमियों के लिए एक कड़वी सच्चाई यह है कि वे इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद भी फिल्म का 'मूल और असली आईमैक्स अनुभव' (Authentic IMAX Experience) हासिल नहीं कर पाएंगे। आइए जानते हैं इसके पीछे की तकनीकी वजह क्या है।

₹3100 की टिकट, फिर भी अनुभव अधूरा क्यों?

यह विरोधाभास किसी फिल्म की कमी के कारण नहीं, बल्कि भारत में मौजूद आईमैक्स थिएटर्स की तकनीकी सीमाओं के कारण है। फिल्म समीक्षकों और तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं:

  • 70mm आईमैक्स स्क्रीन्स की कमी: फिल्म 'The Odyssey' को जिस वास्तविक भव्यता और विशालकाय 70mm आईमैक्स कैमरों से शूट किया गया है, उसे दिखाने के लिए 1.43:1 के 'अस्पेक्ट रेशियो' (Aspect Ratio) वाले विशालकाय स्क्रीन की आवश्यकता होती है। दुर्भाग्य से, भारत में व्यावसायिक फिल्मों के प्रदर्शन के लिए एक भी सक्रिय 70mm फिल्म या डुअल-लेजर (Dual-Laser) आईमैक्स स्क्रीन मौजूद नहीं है।

  • 'LieMAX' का बढ़ता चलन: भारत में मौजूद अधिकांश आईमैक्स स्क्रीन तकनीकी भाषा में 'डिजिटल आईमैक्स' या सिंगल लेजर आईमैक्स हैं, जिन्हें अक्सर सिनेमा की दुनिया में 'LieMAX' (छोटा या रीट्रोफिटेड आईमैक्स) कहा जाता है। ये स्क्रीन सामान्य थिएटरों को थोड़ा बड़ा करके बनाई जाती हैं और इनका अस्पेक्ट रेशियो 1.90:1 होता है।

दर्शकों की जेब पर भारी, अनुभव में कटौती

भारत में मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु जैसे शहरों के प्रीमियम थिएटर्स (जैसे डायरेक्टर कट या आईमैक्स सेलेक्ट) में वीकेंड शोज के लिए टिकट की दरें ₹2500 से ₹3100 के बीच चल रही हैं। सिनेमा प्रेमियों का कहना है कि जब वे दुनिया की सबसे महंगी टिकट दरों में से एक का भुगतान कर रहे हैं, तो उन्हें वैश्विक स्तर का अनुभव मिलना चाहिए।

लेकिन बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की कमी के कारण, भारतीय दर्शकों को फिल्म का वही वर्जन देखने को मिलेगा जो थोड़ा क्रॉप (कटा हुआ) होता है, जिससे फिल्म की वास्तविक विशालता का पूरा अहसास नहीं हो पाता।