जिस बच्ची को कहा गया था “कभी सीधी नहीं हो पाएगी”, उसे रायपुर में मिला नया जीवन
62 डिग्री झुकी रीढ़ हुई सीधी, काशी स्पाइन हॉस्पिटल ने लगातार दूसरी बार रचा इतिहास
रायपुर। छत्तीसगढ़ की चिकित्सा दुनिया में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। रायपुर के शंकर नगर स्थित काशी स्पाइन हॉस्पिटल ने एक 14 वर्षीय किशोरी की 62 डिग्री तक झुकी हुई रीढ़ को सफलतापूर्वक सीधा कर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। यह लगातार दूसरी बार है जब अस्पताल ने अत्यंत जटिल स्कोलियोसिस (रीढ़ की विकृति) सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर यह साबित किया है कि अब ऐसी दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण सर्जरी के लिए मरीजों को दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े महानगरों का रुख करने की आवश्यकता नहीं है।
वर्षों से दर्द और निराशा से जूझ रही थी किशोरी
रायगढ़ निवासी यह किशोरी पिछले कई वर्षों से स्कोलियोसिस नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित थी। उसकी रीढ़ धीरे-धीरे एक तरफ मुड़ती जा रही थी और पीठ पर कूबड़ विकसित हो चुका था। परिवार ने प्रदेश के विभिन्न शहरों में इलाज कराया, कई विशेषज्ञों और फिजियोथेरेपी केंद्रों से सलाह ली, लेकिन अधिकांश जगहों पर उन्हें यही बताया गया कि इस प्रकार की सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण है और छत्तीसगढ़ में संभव नहीं है। कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि ऑपरेशन करवाने पर बच्ची चलने-फिरने की क्षमता भी खो सकती है।
उम्मीद की किरण बनकर सामने आया काशी स्पाइन हॉस्पिटल
लगातार निराशा मिलने के बाद परिवार लगभग उम्मीद छोड़ चुका था। मां को अपनी बेटी के भविष्य, शिक्षा और सामान्य जीवन को लेकर गहरी चिंता सताने लगी थी। इसी दौरान उन्हें काशी स्पाइन हॉस्पिटल के बारे में जानकारी मिली और वे रायपुर पहुंचे।
अस्पताल में विस्तृत जांच, एक्स-रे और एमआरआई के बाद यह स्पष्ट हुआ कि बच्ची की रीढ़ 62 डिग्री तक मुड़ चुकी थी। विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल शारीरिक विकृति का मामला नहीं था, बल्कि समय रहते उपचार नहीं होने पर भविष्य में फेफड़ों और हृदय पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता था। ऐसे मामलों की सर्जरी को दुनिया भर में स्पाइन सर्जरी की सबसे जटिल प्रक्रियाओं में गिना जाता है।
छह घंटे चली हाई-रिस्क सर्जरी
इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी का नेतृत्व काशी स्पाइन हॉस्पिटल के निदेशक एवं वरिष्ठ स्पाइन सर्जन डॉ. विमल अग्रवाल ने किया। ऑपरेशन से पहले विशेष डिफॉर्मिटी इम्प्लांट्स और उपकरण मंगाए गए। मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक न्यूरो-मॉनिटरिंग सिस्टम की व्यवस्था की गई। सर्जरी के दौरान नसों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी गई, जिससे किसी भी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके और आवश्यक कदम तुरंत उठाए जा सकें।
करीब छह घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी के दौरान कई बार ऐसी स्थिति बनी जब नसों पर दबाव के संकेत मिले, लेकिन न्यूरो-मॉनिटरिंग सिस्टम से प्राप्त जानकारी के आधार पर सर्जिकल रणनीति में तत्काल बदलाव किया गया और संभावित जोखिम को सफलतापूर्वक टाल दिया गया। अंततः ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा।
ऑपरेशन के अगले दिन ही चलने लगी मरीज
सर्जरी के बाद जब मरीज को होश आया तो उसके दोनों पैरों की ताकत सामान्य थी और वह पूरी तरह सुरक्षित थी। अगले ही दिन उसे चलाया गया। जिस रीढ़ का झुकाव 62 डिग्री था, वह लगभग पूरी तरह सीधी हो चुकी थी। परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। ऑपरेशन थिएटर के बाहर घंटों इंतजार कर रही मां की आंखों में खुशी के आंसू थे। वर्षों की चिंता और भय की जगह अब राहत और विश्वास ने ले ली थी।
लगातार दूसरी बड़ी सफलता
विशेष बात यह है कि यह काशी स्पाइन हॉस्पिटल की दूसरी बड़ी उपलब्धि है। इससे पहले अस्पताल ने बालोद जिले की एक किशोरी की 48 डिग्री झुकी हुई रीढ़ को अत्याधुनिक स्पाइनल नेविगेशन तकनीक की सहायता से सफलतापूर्वक सीधा किया था। उस उपलब्धि ने पूरे प्रदेश में चर्चा बटोरी थी और अब 62 डिग्री स्कोलियोसिस करेक्शन की सफलता ने अस्पताल को देश के चुनिंदा स्पाइन केंद्रों की श्रेणी में स्थापित कर दिया है।
गांव से जर्मनी तक का प्रेरणादायक सफर
इस उपलब्धि के पीछे खड़े डॉ. विमल अग्रवाल की यात्रा भी प्रेरणादायक है। छत्तीसगढ़ के छोटे से किरारी गांव से निकलकर उन्होंने सरकारी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर देश के प्रतिष्ठित सर गंगाराम हॉस्पिटल, नई दिल्ली से FNB Spine Surgery की सुपर-स्पेशियलिटी ट्रेनिंग हासिल की। इसके बाद उन्हें विश्व की प्रतिष्ठित AO Spine International Fellowship के लिए चयनित किया गया, जहां उन्होंने जर्मनी के म्यूनिख में अत्याधुनिक स्पाइन सर्जरी तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
छत्तीसगढ़ को स्पाइन केयर हब बनाने का लक्ष्य
डॉ. विमल अग्रवाल का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल एक अस्पताल संचालित करना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ को देश का अग्रणी स्पाइन केयर हब बनाना है।
उन्होंने कहा, "मैं छत्तीसगढ़ के लोगों को यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि अब जटिल स्पाइन सर्जरी के लिए हमेशा दिल्ली, मुंबई या विदेश जाने की आवश्यकता नहीं है। आज हमारे प्रदेश में भी विश्वस्तरीय तकनीक, विशेषज्ञता और सुविधाएं उपलब्ध हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी मरीज केवल इलाज की सुविधा के अभाव में अपने घर और परिवार से दूर जाने को मजबूर न हो।"
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को ऐसा स्पाइन सेंटर बनाया जाएगा, जहां केवल प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से भी मरीज उपचार के लिए आएं।
मध्य भारत का पहला एक्सक्लूसिव स्पाइन सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल
बता दें कि शंकर नगर, रायपुर स्थित काशी स्पाइन हॉस्पिटल मध्य भारत का पहला एक्सक्लूसिव स्पाइन सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल है। यहां स्पाइनल नेविगेशन सिस्टम, न्यूरो मॉनिटरिंग, मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी, स्पाइनल डिफॉर्मिटी करेक्शन, स्पाइनल ट्यूमर, ट्रॉमा, फ्रैक्चर, पैरालिसिस, स्लिप डिस्क तथा विश्वस्तरीय फिजियोथेरेपी एवं रिहैबिलिटेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की उपलब्धि
प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में यह उपलब्धि न केवल एक सफल सर्जरी है, बल्कि इस बात का प्रमाण भी है कि अब छत्तीसगढ़ जटिल स्पाइन उपचार के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। काशी स्पाइन हॉस्पिटल की यह सफलता न केवल एक परिवार के लिए नई जिंदगी लेकर आई है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बन गई है।

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