नई दिल्ली: 1 सितंबर 2026 (मंगलवार) का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विशेष माना गया है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की यह तिथि संकटमोचन हनुमान जी और मंगल देव की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। सनातन परंपरा में किसी भी नए काम, धार्मिक अनुष्ठान या यात्रा की शुरुआत से पहले दिन के शुभ-अशुभ मुहूर्त, नक्षत्र, ग्रहों की स्थिति और राहुकाल की जानकारी लेना आवश्यक माना जाता है।
तिथि, नक्षत्र और योग
1 सितंबर को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी। नक्षत्रों की गणना के अनुसार, इस दिन अश्विनी नक्षत्र रहेगा, जिसके पश्चात भरणी नक्षत्र का प्रारंभ होगा। पंचांग के अनुसार आज ध्रुव योग का निर्माण हो रहा है, जो कार्यों में स्थायित्व और सफलता दिलाने के लिए उत्तम माना जाता है। करण की दृष्टि से पहले गर और उसके बाद वणिज करण रहेगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय
आज सूर्योदय सुबह 05:59 बजे होगा और सूर्यास्त शाम 06:43 बजे होगा। चंद्रोदय रात 10:10 बजे होगा, जबकि चंद्रास्त अगले दिन 2 सितंबर को सुबह 09:55 बजे होगा। सूर्यदेव पूरे दिन अपनी स्वराशि सिंह में विराजमान रहेंगे, वहीं चंद्रमा मेष राशि में संचरण करेंगे।
शुभ और अशुभ मुहूर्त
दिन में किसी भी नए व मांगलिक कार्य की शुरुआत के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:55 बजे से 12:46 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 02:30 बजे से 04:05 बजे तक रहेगा। मंगलवार के दिन राहुकाल (अशुभ समय) दोपहर 03:30 बजे से शाम 05:05 बजे तक रहेगा, इस अवधि के दौरान कोई भी नया निवेश या मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। आज दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा, इसलिए इस दिशा में यात्रा करने से पहले थोड़ा गुड़ या तिल खाकर निकलना शुभ माना जाता है।