कोई गांठ नहीं, कोई लक्षण नहीं... फिर भी हो सकता है कैंसर! समय पर स्क्रीनिंग से बच सकती है जान

कोई गांठ नहीं, कोई लक्षण नहीं... फिर भी हो सकता है कैंसर! समय पर स्क्रीनिंग से बच सकती है जान

रायपुर। कैंसर को लेकर आमतौर पर लोगों की धारणा होती है कि शरीर में कोई गांठ, दर्द या अन्य स्पष्ट लक्षण दिखाई देने पर ही बीमारी की आशंका होती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में कैंसर शुरुआती चरण में बिना किसी लक्षण के भी शरीर में विकसित हो सकता है। ऐसे में समय पर स्क्रीनिंग और नियमित जांच बीमारी की जल्द पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

एमएमआई नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, रायपुर की ब्रेस्ट एवं सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा चिखलीकर के अनुसार, कैंसर की पहचान केवल लक्षणों के आधार पर नहीं की जानी चाहिए। कई बार बीमारी तब तक सामने नहीं आती, जब तक वह आगे नहीं बढ़ जाती। इसलिए सही समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।

स्तन कैंसर में बिना गांठ के भी हो सकती है बीमारी

डॉ. आकांक्षा चिखलीकर ने बताया कि स्तन कैंसर के कई मामलों में शुरुआती चरण में कोई गांठ महसूस नहीं होती। 40 वर्ष की आयु के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार क्लिनिकल जांच और मैमोग्राफी जैसी स्क्रीनिंग जांचों के माध्यम से बीमारी का शुरुआती और इलाज योग्य अवस्था में पता लगाया जा सकता है।

सर्वाइकल और कोलन कैंसर की भी समय पर हो सकती है पहचान

गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग से उन असामान्यताओं का पता लगाया जा सकता है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकती हैं। वहीं, कोलन कैंसर की स्क्रीनिंग के दौरान पॉलिप जैसी स्थितियों की पहचान कैंसर बनने से पहले की जा सकती है। शुरुआती अवस्था में इनका उपचार अपेक्षाकृत सरल हो सकता है।

हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होती स्क्रीनिंग

विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर स्क्रीनिंग सभी लोगों के लिए एक जैसी नहीं होती। उम्र, पारिवारिक इतिहास और व्यक्तिगत जोखिम कारकों के आधार पर जांच का तरीका और समय तय किया जाता है। जिन लोगों के करीबी परिवारजनों को कैंसर रहा हो, उन्हें सामान्य से पहले या अधिक नियमित रूप से स्क्रीनिंग की आवश्यकता हो सकती है।

रिपोर्ट सामान्य हो तो भी शंका को न करें नजरअंदाज

डॉ. चिखलीकर ने बताया कि कोई भी जांच 100 प्रतिशत सटीक नहीं होती। असामान्य रिपोर्ट आने का मतलब हमेशा कैंसर होना नहीं है और सामान्य रिपोर्ट होने के बावजूद किसी शंका को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। किसी भी तरह के संदेह या जोखिम की स्थिति में विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

उन्होंने लोगों से लक्षणों का इंतजार न करने और अपने जोखिम कारकों के अनुसार नियमित स्क्रीनिंग कार्यक्रम अपनाने की अपील की।

डॉ. आकांक्षा चिखलीकर ने कहा, “जांच ही जीत है। समय पर पहचान, जान बचा सकती है।”