पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कटौती से सरकारी खजाने को बड़ा झटका; वित्त मंत्री बोलीं- "सरकार को ₹1 लाख करोड़ का नुकसान'
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (excise duty) में की गई कटौती के बाद देश के राजस्व को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि ईंधन की कीमतों में दी गई इस बड़ी राहत के कारण सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ने वाला है। वित्त मंत्री के मुताबिक, टैक्स में की गई इस कटौती की वजह से सरकार को चालू वित्त वर्ष में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
राजस्व में होने वाले इस भारी नुकसान के बावजूद, वित्त मंत्री ने साफ किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य आम जनता को महंगाई के चौतरफा दबाव से राहत देना था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम कम करना बेहद जरूरी हो गया था, ताकि आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सके और माल ढुलाई महंगी होने से रोका जा सके।
हालांकि, 1 लाख करोड़ रुपये के इस राजस्व घाटे के कारण अब सरकार के सामने अपने राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) के लक्ष्य को बनाए रखने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को आगामी महीनों में अन्य स्रोतों से राजस्व जुटाने या अपने कुछ गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने जैसे कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।

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