झीरम घाटी नक्सली कांड में आज ऐतिहासिक फैसला: जगदलपुर की विशेष NIA अदालत सुनाएगी 10 दोषियों को सजा

झीरम घाटी नक्सली कांड में आज ऐतिहासिक फैसला: जगदलपुर की विशेष NIA अदालत सुनाएगी 10 दोषियों को सजा
पीड़ित परिवारों की टिकी निगाहें
जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और वीभत्स झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में आज न्याय का एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय पूरा होने जा रहा है। जगदलपुर स्थित विशेष एनआईए (NIA) अदालत आज इस मामले के 10 दोषियों के खिलाफ सजा का ऐलान करेगी। 25 मई 2013 को हुए इस नरसंहार में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व सहित 31 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। अदालत द्वारा बीते 5 सितंबर 2026 को इन 10 आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद अब पूरे प्रदेश और पीड़ित परिवारों की निगाहें आज सुनाए जाने वाले दंडादेश पर टिकी हुई हैं।

25 मई 2013 का वो खूनी मंजर और कांग्रेस नेतृत्व का सफाया

झीरम घाटी कांड भारतीय राजनीति और छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे भयानक नक्सली हमलों में से एक माना जाता है। 25 मई 2013 को बस्तर में कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' से लौट रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं के काफिले पर नक्सलियों ने झीरम घाटी के दुर्गम जंगलों में घात लगाकर हमला बोल दिया था। इस ताबड़तोड़ गोलीबारी और बारूदी धमाकों में 31 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 38 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व गृहमंत्री व 'सलवा जुडूम' के प्रणेता महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कई वरिष्ठ नेता शहीद हो गए थे। वहीं गंभीर रूप से घायल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री व वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल की भी इलाज के दौरान बाद में मौत हो गई थी।

1000 से अधिक पन्नों की चार्जशीट और 100 से ज्यादा गवाहों की गवाही

घटना की भयावहता को देखते हुए मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई थी। एनआईए की टीम ने लंबी और गहन जांच प्रक्रिया के बाद अदालत में एक हजार से अधिक पन्नों का विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था। इस पूरे न्यायिक ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 100 से अधिक महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए गए। जांच एजेंसी ने कुल 11 नक्सलियों और सहयोगियों को आरोपी बनाया था, जिनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने 5 सितंबर को शेष सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था।

फैसले के बीच जांच पर सवाल और बड़ी साजिश के पर्दाफाश की मांग

एक तरफ जहां अदालत दोषियों को सजा सुनाकर न्यायिक प्रक्रिया के एक अहम चरण को पूरा करने जा रही है, वहीं दूसरी ओर इस फैसले के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच इस कांड को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस का कहना है कि एनआईए की यह जांच अब भी अधूरी है और इसमें इस जघन्य वारदात के पीछे छिपी 'बड़ी राजनीतिक साजिश' तथा अन्य मुख्य षड्यंत्रकारियों की भूमिका का पूर्ण खुलासा नहीं हो सका है। पार्टी की मांग है कि इस षड्यंत्र की तह तक जाने के लिए जांच का दायरा आगे भी बढ़ाया जाना चाहिए। इसके बावजूद, आज आने वाले सजा के फैसले को झीरम घाटी के पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।