31 अक्टूबर 2026 का पंचांग: शनिवार को कार्तिक कृष्ण सप्तमी तिथि और पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग; जानिए शुभ मुहूर्त और राहुकाल
नई दिल्ली/रायपुर: सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण से निर्मित पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। 31 अक्टूबर 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पावन और फलदायी है। शनिवार का दिन संकटमोचन भगवान श्री हनुमान और न्याय के देवता शनिदेव की उपासना के लिए समर्पित होता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करने से शनि दोष, ढैय्या और जीवन की तमाम मानसिक व शारीरिक व्याधियों से मुक्ति मिलती है।
पंचांगीय गणना के अनुसार 31 अक्टूबर 2026 को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी। आज सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 31 मिनट पर होगा, वहीं सूर्यास्त सायं 5 बजकर 37 मिनट पर दर्ज किया जाएगा। चंद्र देव आज अपने स्वामी ग्रह बुध की राशि मिथुन में संचार करेंगे, जिससे जातकों में निर्णय लेने की क्षमता, तार्किक शक्ति और व्यापारिक समझ में वृद्धि होगी। नक्षत्रों की बात करें तो आज पुनर्वसु नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसके साथ सिद्ध योग का सुंदर और मंगलकारी संयोग बन रहा है। सिद्ध योग में किए गए सभी धार्मिक अनुष्ठान और प्रशासनिक कार्य निर्विघ्न रूप से संपन्न होते हैं।
दिन के सबसे शुभ समय यानी अभिजीत मुहूर्त की बात करें तो 31 अक्टूबर को यह दोपहर 11 बजकर 42 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस समयावधि में नया व्यापार शुरू करना, खरीदारी करना या धार्मिक संकल्प लेना अत्यंत शुभ माना गया है। दूसरी ओर, राहुकाल को अशुभ समय माना जाता है, जिसमें किसी भी नए या मंगल कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। शनिवार को राहुकाल प्रातः 9 बजकर 18 मिनट से सुबह 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस दौरान विशेष सतर्कता बरतें।
शनिवार के इस पावन अवसर पर शनिदेव और हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रातः स्नान के बाद सरसों के तेल का दीपक जलाएं तथा हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें। इसके अलावा शाम के समय पीपल के वृक्ष के पास दीपक प्रज्वलित करने और जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द की दाल या काले वस्त्र दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
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