बम्बू गाड़कर छांव के लिए किया जा रहा पालिका के लगाए गमले का उपयोग

बम्बू गाड़कर छांव के लिए किया जा रहा पालिका के लगाए गमले का उपयोग

दंतेवाड़ा से राजू शर्मा की रिपोर्ट

दंतेवाड़ा। दो वर्ष पूर्व नगर पालिका चुनाव के ठीक पहले आम जनता को खुश करने एवं नगर में कुछ अच्छा काम दिखाने के नियत से अध्यक्ष फण्ड से लाखों रूपए खर्च कर बड़े साईज के सैकड़ों गमले एवं सीमेंट चेयर बेंच की खरीदी की गई थी जिसे नगर के चौक चौराहों सार्वजनिक स्थानों एवं अलग अलग वार्डो में रखवाया गया था। इसका भरपुर फायदा भी पालिका चुनाव में में मिला। पालिका चुनाव बीते करीब डेढ़ वर्ष होने को है आज की स्थिति में लगाए गए 90 फीसदी गमले एवं सीमेंट चेयर टूट फूटकर खराब हो चुके हैं। गमलों की स्थिति तो ऐसी हो गई है कि कोई इसे कूडेदान के रूप में इस्तेमाल कर रहा है तो कोई पिकदान के रूप में। कुछ लोग तो पिल्लर की जगह गमले में रेती भर बम्बू गाड़कर दुकान को धूप से बचाने छांव के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। हद ही हो गया है नगर पालिका परिषद का हाल। आम जनता के टैक्स के रूपयों की बर्बादी इसे न कहें तो और क्या कहेंगे। बस स्टेंड परिसर में एक डेली निडस की दुकान के सामने दो बड़े गमले पौधें लगाकर रखे गए थे आज उन गमलों की स्थिति क्या है चित्र देखकर स्वयं समझा जा सकता है। गमलों में लगे पौधे आज पुरी तरह से गायब हो चुके हैं केवल पौधों के ठूंठ ही नजर आ रहे हैं। अधिकांश गमलों में लोग गुटखा खाकर पीकदान के रूप में उपयोग कर रहे हैं तो कहीं गमलों में कूडा फेंकने के लिए उपयोग हो रहा है। सीमेंट चेयर बेंच की भी करीब करीब ऐसी ही स्थिति है ज्यादातर बेंच घटिया क्वालिटी के होने के चलते टूट कर खराब हो चुके हैं। बेहद ही लज्जा की बात है कि जिस नगर पालिका की अध्यक्ष सत्तारूढ पार्टी से भी जुडी हुई हैं वो महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष के दायित्व पर भी हैं। जिनके कर कमलों द्वारा ही गमलायुक्त पौधें एवं सीमेंट बेंच लगाने का अभियान चलाया गया था आज उनके घर के सामने लगे गमलों की स्थिति किस हाल में है एक बार अवश्य उन्हें जाकर झांककर देखना चाहिए। सीमेंट चेयर बेच की दुदर्शा भी गमलों से अलग नहीं है। पार्कों में रखे कई बेंच टूटे पड़े हैं।


 भाजपा सरकार एक ओर एक पेड़ मां के नाम अभियान चलाती है और सभी को जीवन में एक पेड़ अवश्य लगाने का संकल्प दिलाती है उन्हीं भाजपा के राज में सैकड़ों गमलें में लगाए गए पौधे आज ढूंढे नहीं मिल रहे। गमले से पौधे गायब हैं ऐसे में प्रदेश की हरियाली को हरा भरा बनाए रखने प्रधानमंत्री मोदी जी का संकल्प कैसे पूरा हो सकता है। क्या पौधों के नाम पर लाखों रूपए की बर्बादी करने वालों के खिलाफ भाजपा राज में कोई कारवाई कभी हो भी पाएगी? यह आगे देखने वाली बात होगी।