छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा को मिलेगी नई दिशा: 700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती को मंजूरी, पदोन्नति और नियुक्तियों पर भी बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा को मिलेगी नई दिशा: 700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती को मंजूरी, पदोन्नति और नियुक्तियों पर भी बड़ा फैसला

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में भर्ती, पदोन्नति, प्रशासनिक सुधार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक में सबसे अहम फैसला सहायक प्राध्यापकों के 700 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने को लेकर लिया गया। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी न हो और इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इसके अलावा विभाग के अन्य रिक्त पदों को भरने के लिए भी शासन को प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया है। सीजीपीएससी के माध्यम से होने वाली भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सत्यापन कार्य को भी तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए मंत्री ने स्नातक महाविद्यालयों में प्राचार्यों की पदोन्नति प्रक्रिया 31 जुलाई 2026 तक पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नए शिक्षा सत्र में किसी भी कॉलेज को नियमित प्राचार्य के बिना नहीं रहने दिया जाएगा।

बैठक में प्राध्यापकों और कर्मचारियों से जुड़े लंबित मामलों पर भी निर्णय लिए गए। वर्ष 2019 से पहले के पात्र सहायक प्राध्यापकों को वर्ष 1990 के नियमों के तहत पदोन्नति देने का रास्ता साफ किया गया है। वहीं वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान से संबंधित सूचियों को जल्द जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। अतिथि प्राध्यापकों की सेवा शर्तों में सुधार को लेकर गठित समिति की रिपोर्ट पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।

कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सहायक ग्रेड-3 तथा चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर नियुक्तियां राज्य कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से की जाएंगी। सरकार का दावा है कि इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।

ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए महाविद्यालयों में “90 घंटे, 90 दिन” का विशेष अंग्रेजी संप्रेषण कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाना और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है।

बैठक में वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि विभाग में वित्तीय अनियमितताओं के लिए कोई स्थान नहीं है। अब किसी भी महाविद्यालय को बजट जारी करने से पहले प्रशासनिक स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। नए महाविद्यालयों के विकास के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किए जाने पर भी सहमति बनी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रभावी क्रियान्वयन को आगे बढ़ाते हुए स्नातकोत्तर स्तर पर भी नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। विभाग द्वारा एनईपी के तहत पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है।

इसके अलावा प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ‘अपर संचालक’ और ‘प्राचार्य’ के पदों को अलग करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही प्राचार्यों के कार्यकाल और वित्तीय प्रबंधन की समीक्षा के लिए लेखा प्रशिक्षित कर्मचारियों की सेवाएं लेने का फैसला किया गया है।

बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से उच्च शिक्षा संस्थानों की कार्यप्रणाली में सुधार होगा, शिक्षण व्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।