सारा जगत शिव-शक्ति स्वरुप है : डॉ. इंदुभवानंद तीर्थ
रायपुर। श्री शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला रायपुर में जारी दिव्य चातुर्मास प्रवचन माला की श्रृंखला को गति देते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ. इंदुभवानंद तीर्थ महाराज ने बताया कि सारा जगत बिंदु नाद स्वरूप है। बिंदु शक्ति है और नाद शिव है इस तरह यह जगत शिव शक्ति स्वरुप ही है। नाद बिंदु का और बिंदु इस जगत का आधार है। ये बिंदु और नाद शक्ति और शिव संपूर्ण जगत के आधार रूप से स्थित है। बिंदु और नाद से युक्त सब कुछ शिवस्वरूप है। क्योंकि वही सबका आधार है। आधार में ही आधेय का समावेश अथवा लय होता है। यही सकलीकरण है। इस सकलीकरण की स्थिति से ही सृष्टिकाल में जगत् का प्रादुर्भाव होता है, इसमें संशय नहीं है।

शिवलिंग बिंदुनादस्वरूप है, अतः उसे जगत् का कारण बताया जाता है। बिंदु देवी है और नाद शिव है इन दोनों का संयुक्त रूप ही शिवलिंग कहलाता है। अतः जन्म के संकट से छुटकारा पाने के लिए शिवलिंग की पूजा अवश्य करनी चाहिए। बिंदु रूपा देवी उमा माता है और नादस्वरूप भगवान शिव पिता है। इन माता-पिता के पूजित होने से परमानंद की प्राप्ति होती है। अतः परमानंद का लाभ लेने के लिए शिवलिंग का विशेष रूप से पूजन करना चाहिए।

यह सावन का अत्यंत पुनीत मास है इस मास में भगवान शिव का पूजन करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं भगवान शिव को जलधारा अत्यंत पी है इस सावन के माह में प्रकृति स्वयं जल की धारा छोड़ती है अतः यही कारण है कि यह माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। कथा के पूर्व समस्त भक्तों ने मिलकर शिव पुराण पोथी का पूजन किया। आरती के पश्चात कथा प्रारंभ हुई।
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