समाजसेवी कुबेर राठी का अटूट संकल्प : हर शनिवार 6,000 से अधिक श्रद्धालु ग्रहण करते हैं महाभोग प्रसाद
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का रेलवे स्टेशन परिसर केवल यात्रियों की आवाजाही का केंद्र ही नहीं, बल्कि अगाध आस्था और निष्काम जनसेवा का एक जाग्रत सिद्ध पीठ भी है। यहाँ स्थित 'श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर' श्रद्धालुओं के लिए संकटहारक और मनोकामना पूर्ण करने वाला परम धाम माना जाता है। इस पावन धाम की महिमा का एक मुख्य स्तंभ यहाँ विगत 17 वर्षों (सन् 2009) से लगातार आयोजित होने वाला शनिवार का विशाल महाभंडारा है।
मंदिर समिति के संस्थापक और प्रसिद्ध समाजसेवी कुबेर राठी एवं उनके परिवार द्वारा वर्ष 2009 में शुरू किया गया यह महाभंडारा आज एक महा-अभियान का रूप ले चुका है। कड़कड़ाती ठंड हो, चिलचिलाती धूप या फिर मूसलाधार बारिश मौसम का कोई भी रूप संस्थापक कुबेर राठी के इस दृढ़ संकल्प को डिगा नहीं पाया है। प्रत्येक शनिवार को बिना किसी रुकावट के यहाँ 5,000 से 6,000 से अधिक श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण करते हैं।
महाभंडारे की तैयारियाँ शनिवार तड़के से ही संस्थापक कुबेर राठी के कार्यालय में पूरे उत्साह के साथ प्रारंभ हो जाती हैं। सेवा का यह पावन क्रम दो सुव्यवस्थित चरणों में संचालित किया जाता है। इसके प्रथम चरण में सुबह से दोपहर तक भंडारा कार्यालय स्थित भवन में श्रद्धालुओं को पूरी आत्मीयता और सम्मान के साथ कुर्सी-टेबल पर बैठाकर भोजन कराया जाता है। इसके पश्चात, द्वितीय चरण में संध्या ढलते ही महाप्रसाद का वितरण सिद्ध हनुमान मंदिर परिसर में शुरू होता है, जो देर रात तक बिना किसी रुकावट के अनवरत चलता रहता है।
इस महाभंडारे की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहाँ जात-पात, ऊँच-नीच और धर्म-संप्रदाय के सारे सामाजिक भेद पूरी तरह मिट जाते हैं। सर्वधर्म समभाव और आत्मीयता के इस पावन प्रांगण में हर वर्ग और हर धर्म के लोग एक साथ बैठकर प्रभु का प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह आयोजन न केवल भुखमरी मिटाने की एक निःस्वार्थ पहल है, बल्कि समाज में एकता, प्रेम और सद्भावना का अलौकिक संदेश भी देता है।
इस अलौकिक सेवा यात्रा के संदर्भ में समिति के संस्थापक कुबेर राठी कहते हैं कि यह पवनपुत्र हनुमान जी की ही असीम कृपा और प्रेरणा है। मेरा यह परम सौभाग्य है कि महाबली श्री हनुमान जी ने मुझे और मेरे परिवार को इस पवित्र कार्य के निमित्त चुना। यह हनुमान जी का सिद्ध धाम है, जहाँ सच्चे मन से माँगी गई हर दुआ और मनोकामना अवश्य पूरी होती है। प्रभु अपने शरण में आने वाले हर भक्त के कष्टों का निवारण करते हैं।
कुबेर राठी ने आगे कहा कि हनुमान जी का यह सिद्ध धाम केवल एक पूजा-स्थल नहीं, बल्कि लाखों भक्तों की आस्था और अटूट विश्वास का केंद्र है। यहाँ आने वाला कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता और संकटमोचन प्रभु सभी के दुखों और संकटों का निवारण करते हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि इतने वर्षों से अनवरत चल रहा यह महाभंडारा किसी इंसान का प्रयास नहीं, बल्कि स्वयं बजरंगबली की अलौकिक प्रेरणा और कृपा का परिणाम है; जब तक प्रभु की इच्छा होगी, यह सेवा-प्रवाह इसी तरह अविरल बहता रहेगा।
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