शराब घोटाले में जेल से छूटते ही फिर गिरफ्तार हुए अरुणपति त्रिपाठी; 'ओवरटाइम घोटाले' में EOW ने ली दो दिनों की रिमांड

शराब घोटाले में जेल से छूटते ही फिर गिरफ्तार हुए अरुणपति त्रिपाठी; 'ओवरटाइम घोटाले' में EOW ने ली दो दिनों की रिमांड

रायपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में महीनों जेल की सलाखों के पीछे बिताने के बाद बाहर आए आबकारी विभाग के पूर्व विशेष सचिव और CSMCL के पूर्व एमडी अरुणपति त्रिपाठी (Arunpati Tripathi) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जेल से रिहा होते ही आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने उन्हें एक नए मामले में दोबारा गिरफ्तार कर लिया है।

यह नई कार्रवाई करोड़ों रुपये के कथित 'ओवरटाइम घोटाले' (Overtime Scam) के सिलसिले में की गई है, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें दो दिनों की EOW रिमांड पर भेज दिया है।

जेल से बाहर आते ही दोबारा गिरफ्तारी

अरुणपति त्रिपाठी को आबकारी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महीनों की कानूनी जद्दोजहद के बाद आखिरकार जेल से रिहाई मिली थी। लेकिन उनकी यह आजादी चंद घंटों की ही साबित हुई। EOW की टीम पहले से ही मुस्तैद थी और जैसे ही वे तकनीकी प्रक्रियाओं के बाद जेल से बाहर आए, उन्हें एक दूसरे मामले में हिरासत में ले लिया गया।

क्या है यह 'ओवरटाइम घोटाला'?

शराब घोटाले के बाद सामने आए इस नए मामले में आबकारी विभाग और प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप हैं:

  • फर्जी ओवरटाइम का खेल: आरोप है कि त्रिपाठी के कार्यकाल के दौरान शराब दुकानों में तैनात प्लेसमेंट कर्मचारियों के नाम पर कागजों में फर्जी 'ओवरटाइम' दिखाया गया और इसके बदले करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।

  • वित्तीय अनियमितता: जांच एजेंसी का मानना है कि इस फर्जी भुगतान के जरिए सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया और यह राशि कथित तौर पर कमीशन और रिश्वत के रूप में खपाई गई।

EOW को मिली दो दिनों की रिमांड

दोबारा गिरफ्तारी के बाद EOW के अधिकारियों ने अरुणपति त्रिपाठी को विशेष अदालत में पेश किया।

  • एजेंसी की दलील: EOW ने अदालत के सामने तर्क दिया कि इस पूरे ओवरटाइम रैकेट के पीछे छिपे सिंडिकेट और पैसों के लेन-देन (Money Trail) का पता लगाने के लिए आरोपी से हिरासत में गहन पूछताछ बेहद जरूरी है।

  • अदालत का फैसला: दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अरुणपति त्रिपाठी को दो दिनों की EOW रिमांड पर सौंप दिया। अब अगले दो दिनों तक एजेंसी उनसे इस नए घोटाले की कड़ियों को लेकर सवाल-जवाब करेगी।

  • कानूनी जानकारों की राय:

"एक मामले में जमानत या रिहाई मिलने के तुरंत बाद दूसरी एजेंसी या दूसरे मामले में गिरफ्तार होना यह दर्शाता है कि आरोपी के खिलाफ जांच का दायरा काफी बड़ा है। अरुणपति त्रिपाठी के मामले में बैक-टू-बैक हुई इस कार्रवाई से साफ है कि आने वाले दिनों में उनकी कानूनी मुसीबतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।"