पंचांग 6 अगस्त : सावन कृष्ण नवमी का शुभ संयोग; जानें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल
नई दिल्ली: वैदिक ज्योतिष परंपरा में किसी भी नए, धार्मिक या मांगलिक कार्य की शुरुआत से पहले दिन के पंचांग का अवलोकन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। 6 अगस्त (गुरुवार) का दिन विशेष धार्मिक महत्व रखता है क्योंकि यह सावन (श्रावण) मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। गुरुवार का दिन सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना के लिए समर्पित होता है।
पंचांग के माध्यम से तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ मुहूर्तों की सटीक जानकारी मिलती है, जिससे कार्यों में किसी प्रकार का विघ्न नहीं आता। आइए जानते हैं 6 अगस्त का संपूर्ण पंचांग:
तिथि और संवत
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तारीख: 6 अगस्त
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दिन: गुरुवार
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मास: श्रावण (सावन)
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पक्ष: कृष्ण पक्ष
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तिथि: नवमी तिथि
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विक्रम संवत: 2083
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शक संवत: 1948
सूर्य और चंद्रमा का समय
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सूर्योदय: प्रातः 05:45 बजे
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सूर्यास्त: सायं 07:06 बजे
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चंद्रोदय: रात्रि 02:20 बजे (7 अगस्त)
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चंद्रास्त: दोपहर 02:50 बजे
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चंद्र राशि: वृषभ राशि
नक्षत्र, योग और करण
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नक्षत्र: कृतिका नक्षत्र, तत्पश्चात रोहिणी नक्षत्र
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योग: व्याघात योग
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करण: गर करण, तत्पश्चात वणिज करण
शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:21 बजे से 05:03 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक (भगवान विष्णु की पूजा, खरीदारी और नए कार्यों की शुरुआत के लिए सर्वश्रेष्ठ)
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:41 बजे से 03:34 बजे तक
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गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:06 बजे से 07:28 बजे तक
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अमृत काल: सायं 06:10 बजे से रात्रि 07:50 बजे तक
अशुभ समय और राहुकाल (Inauspicious Timings)
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राहुकाल: दोपहर 02:07 बजे से सायं 03:47 बजे तक (इस समय के दौरान कोई भी नया कार्य, पूजा-पाठ का संकल्प या बड़ा वित्तीय सौदा करने से बचें)
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यमगंड: प्रातः 05:45 बजे से 07:25 बजे तक
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गुलिक काल: प्रातः 09:05 बजे से 10:46 बजे तक
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दिशा शूल: दक्षिण दिशा (गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा में यात्रा करने से परहेज करना चाहिए। यदि यात्रा अनिवार्य हो तो घर से दही या पीली सरसों खाकर ही प्रस्थान करें)
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