नई दिल्ली: 3 सितंबर 2026 (गुरुवार) का दिन सनातन परंपरा में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। गुरुवार का दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना के लिए समर्पित माना गया है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की इस तिथि पर किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, यात्रा या नए कार्य की शुरुआत से पहले पंचांग के माध्यम से शुभ-अशुभ मुहूर्त, नक्षत्र, योग और राहुकाल का विचार करना अत्यंत फलदायी होता है।
तिथि, नक्षत्र और योग
3 सितंबर को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रहेगी, जिसके उपरांत नवमी तिथि का प्रारंभ होगा। नक्षत्रों की गणना के अनुसार आज कृत्तिका नक्षत्र रहेगा, जिसके पश्चात रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत होगी। पंचांग के अनुसार इस दिन हर्षण योग का निर्माण हो रहा है, जिसके बाद वज्र योग रहेगा। करण की दृष्टि से कौलव और उसके पश्चात तैतिल करण रहेगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय
आज सूर्योदय सुबह 06:00 बजे होगा और सूर्यास्त शाम 06:41 बजे होगा। चंद्रोदय मध्यरात्रि के बाद (4 सितंबर तड़के) 12:12 बजे होगा, जबकि चंद्रास्त दोपहर 12:05 बजे होगा। सूर्यदेव पूरे दिन अपनी स्वराशि सिंह में विराजमान रहेंगे, वहीं चंद्रमा दिनभर वृषभ राशि में संचरण करेंगे।
शुभ और अशुभ मुहूर्त
गुरुवार के दिन अभिजीत मुहूर्त विशेष रूप से शुभ माना जाता है। आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:55 बजे से 12:45 बजे तक रहेगा। इस अवधि में किसी भी नए व मांगलिक कार्य की शुरुआत की जा सकती है।
गुरुवार के दिन राहुकाल (अशुभ समय) दोपहर 01:56 बजे से 03:31 बजे तक रहेगा। राहुकाल की अवधि के दौरान नया निवेश, लेन-देन या शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। गुरुवार के दिन दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहता है, इसलिए इस दिशा में यात्रा करने से पहले थोड़ा दही या जीरा खाकर निकलना शुभ माना जाता है।