अब महासमुंद के बेल्टुकरी भोरिंग में बनेगी चावल से शराब

अब महासमुंद के बेल्टुकरी भोरिंग में बनेगी चावल से शराब

- शराब बनाने मैदान पर उतरा चौथा प्लेयर
- पिकाडिली एग्रो सरकार को थोक में करेगी सप्लाई

रायपुर (चैनल इंडिया)। राज्य में शराब उत्पादन के कारोबार में एक चौथा प्लेयर भी आ गया है। पिकाडिली एग्रो इंड्रस्टीज लिमिटेड ने महासमुंद के बेल्टुकरी भोरिंग में अपना नया कारखाना शुरू किया है। राज्य सरकार ने इस डिस्टलरी को शराब बनाने का लाइसेंस दिया है। अब इस कंपनी से सरकार थोक में देशी शराब खरीदेगी। सूत्रों के अनुसार यह कंपनी ग्रेन यानी अनाज से देशी शराब का निर्माण करेगी। यहां चावल से शराब बनाए जाने की जानकारी मिली है।

आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस डिस्टलरी के शुरू होने से राज्य में देशी की किल्लत दूर हो सकेगी। इधर राज्य सरकार ने शराब निर्माता कंपनियों को प्लास्टिक की बोतल में शराब सप्लाई करने के लिए एक माह की मोहलत और बढ़ा दी है। छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग ने राज्य में देशी मदिरा (मसाला और प्लेन) की आपूर्ति के लिए नई थोक प्रदाय दरें (लैंडिंग प्राईस)निर्धारित कर दी हैं। यह निर्णय वर्ष 2026-27 की शेष अवधि के लिए प्रभावी होगा, जिसके तहत महासमुंद जिले में स्थित मेसर्स पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड को आधिकारिक रूप से मदिरा प्रदाय करने की मंजूरी दी गई है। यह व्यवस्था प्लास्टिक की बोतलों में उपलब्ध मदिरा के लिए लागू की गई है।

प्रदेश में देशी शराब के कारोबार में तीन बड़े खिलाड़ी मौजूद थे, इनमें भाटिया, वेलकम और केडिया डिस्टरी के नाम शामिल थे। अब इसमें एक और चौथा खिलाड़ी पिकाडिली एग्रो इंड्रस्टीज के रूप में सामने आ गया है। सूत्रों के अनुसार यह कंपनी ग्रेन यानी अनाज से देशी शराब का निर्माण करेगी। यहां चावल से शराब बनाए जाने की जानकारी मिली है।

प्लास्टिक की बोतल के लिए एक माह का समय
राज्य में देशी और अंग्रेजी शराब की बिक्री फाइबर (प्लास्टिक) की बोतल में बेचने का फैसला राज्य सरकार ने किया था। यह व्यवस्था अप्रैल से लागू करने की तैयारी थी। लेकिन यह व्यवस्था अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। इसके पीछे वजह ये बताई जाती है कि शराब निर्माता कंपनियों का बोतल भराई का सिस्टम कांच की बोतल के लिए बना है। प्लास्टिक की बोतल में शराब भरने के दौरान प्लास्टिक की बोतल गिर जाती है। इसलिए बोतल भराई में अधिक समय लगता है। इसी वजह से उत्पादन में 80 प्रतिशत की कमी आई थी। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने 31 मई तक कांच की बोतल में ही सप्लाई को मंजूरी दी थी, लेकिन यह अवधि अब बीत चुकी है। अब भी प्लास्टिक की बोतल में सप्लाई नहीं हो पा रही है। इसे देखते हुए सरकार ने शराब कंपनियों को एक माह का समय और दिया है।