मखाने खरीदने से पहले जरूर परखें ये 4 खास बातें: केमिकल से धुले और खराब मखाने सेहत को पहुंचा सकते हैं नुकसान

मखाने खरीदने से पहले जरूर परखें ये 4 खास बातें: केमिकल से धुले और खराब मखाने सेहत को पहुंचा सकते हैं नुकसान
नई दिल्ली/लाइफस्टाइल: सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाने वाला मखाना (फॉक्स नट्स) आज हर घर की डाइट का अहम हिस्सा बन चुका है। वजन घटाने से लेकर दिल को तंदुरुस्त रखने और हड्डियों को मजबूत बनाने तक, मखाने के अनगिनत स्वास्थ्य लाभ हैं। हालांकि, बाजार में बढ़ती मांग के कारण आजकल मिलावटी, केमिकल युक्त और नमी वाले मखाने भी धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। ऐसे मखाने सेहत को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान पहुंचा सकते हैं। यदि आप भी बाजार या सुपरमार्केट से मखाना खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो 4 महत्वपूर्ण संकेतों की जांच करना बेहद आवश्यक है, ताकि आप शुद्ध और पौष्टिक मखाना ही अपने घर लाएं।

अत्यधिक सफेद रंग से बचें, प्राकृतिक रंग की ही करें पहचान

बाजार में मिलने वाले मखानों को चुनते समय उनके रंग पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अक्सर लोग पूरी तरह से चमकदार और दूधिया सफेद दिखने वाले मखानों को बेहतर मान लेते हैं, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। प्राकृतिक मखाने का रंग हल्का पीलापन लिए हुए या ऑफ-व्हाइट (कम सफेद) होता है। कई विक्रेता मखानों को ज्यादा आकर्षक और चमकदार बनाने के लिए उन्हें हाइड्रोजन पेरोक्साइड या अन्य रसायनों से ब्लीच कर देते हैं। इस तरह के केमिकल युक्त मखाने पाचन तंत्र और सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं, इसलिए हमेशा प्राकृतिक रंगत वाले मखाने ही खरीदने चाहिए।

मखाने का आकार और कुरकुरापन अवश्य जांचें

मखाने की गुणवत्ता की पहचान उसके आकार और बनावट से आसानी से की जा सकती है। गुणवत्तापूर्ण मखाना हमेशा बड़े आकार का, गोल और फुला हुआ होता है। छोटे, पिचके या टूटे हुए मखाने अक्सर पुरानी फसल या खराब गुणवत्ता के होते हैं। इसके साथ ही, मखाने को हाथ से दबाकर उसका कुरकुरापन (क्रंच) जांचना बहुत जरूरी है। यदि मखाना दबाने पर असानी से दबता है या रबर की तरह खिंचता है, तो इसका सीधा अर्थ है कि उसमें नमी आ चुकी है। नमी वाले मखाने बहुत जल्द फफूंद (फंगस) की चपेट में आ जाते हैं और उनका स्वाद भी बिगड़ जाता है।

काले धब्बे और कीड़ों की मौजूदगी पर दें विशेष ध्यान

मखाना खरीदते समय उसके बाहरी छिलके और निशानों को गौर से देखना चाहिए। कम गुणवत्ता वाले या पुराने मखानों में छोटे-छोटे छिद्र (छेद) या काले-भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि मखाने के अंदर कीड़े लग चुके हैं या वह सड़ रहा है। इसके अलावा, कई मखानों पर उनके कमल के बीज का कड़ा काला छिलका चिपका रह जाता है, जो खाते समय दांतों में फंस सकता है और स्वाद बिगाड़ देता है। इसलिए खरीदारी करते समय साफ-सुथरे और बिना छेद वाले मखानों का ही चयन करना समझदारी है।

गंध और पैकिंग की गुणवत्ता से करें ताजगी का आकलन

मखाने की ताजगी का अनुमान उसकी गंध और पैकिंग से आसानी से लगाया जा सकता है। ताजा मखाना हमेशा गंधहीन होता है या उसमें एक हल्की प्राकृतिक खुशबू होती है। यदि मखाने में से किसी तरह की पुरानी, सड़ी हुई या तेल की दुर्गंध आ रही हो, तो उसे भूलकर भी न खरीदें। इसके साथ ही खुली दुकानों से खुले में रखे मखाने खरीदने के बजाय हमेशा एयरटाइट (हवाबंद) पैकेट में मिलने वाले मखाने ही चुनने चाहिए। खुले मखाने हवा के संपर्क में आकर अपनी पौष्टिकता और कुरकुरापन खो देते हैं, जबकि अच्छी पैकिंग नमी और धूल-मिट्टी से सुरक्षा प्रदान करती है।

इन आसान और महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखकर आप बाजार में मिलने वाले घटिया व केमिकल युक्त मखानों की पहचान कर सकते हैं। सही और जैविक रूप से शुद्ध मखाने का चयन न केवल आपकी रसोई के स्वाद को बढ़ाएगा, बल्कि आपके परिवार को संपूर्ण पोषण और अच्छी सेहत भी प्रदान करेगा।