स्कूली बच्चे अब पढ़ेंगे तीजनबाई और बस्तर दशहरे की कथाएं

स्कूली बच्चे अब पढ़ेंगे तीजनबाई और बस्तर दशहरे की कथाएं

NCERT सिलेबस में छत्तीसगढ़ की संस्कृति शामिल

रायपुर (चैनल इंडिया)। छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने शैक्षणिक सत्र से कक्षा चौथी और सातवीं के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम में सुधार किया है। अब बच्चों को सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें अपनी माटी, लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत से भी जुडऩे का अवसर
मिलेगा।

नए पाठ्यक्रम में छत्तीसगढ़ की लोककला और लोक परंपराओं को शामिल किया गया है। बस्तर दशहरा, लोकगीत, लोक नृत्य और पारंपरिक त्योहार अब बच्चों की पढ़ाई का हिस्सा होंगे। इससे बच्चे अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान को समझ पाएंगे। शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही इन परंपराओं के माध्यम से स्थानीय जीवन और सांस्कृतिक मूल्य सीखेंगे। पाठ्यक्रम में सड़क सुरक्षा, प्राथमिक उपचार और सामाजिक जागरुकता जैसे आधुनिक विषय भी शामिल किए गए हैं। इससे बच्चे जीवन में जरूरी सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी आसानी से सीख सकेंगे। 

उदाहरण के लिए, सड़क पार करते समय सुरक्षा नियमों का पालन, छोटे-मोटे चोट या दुर्घटना पर प्राथमिक उपचार करना, और समाज में अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना अब पढ़ाई का हिस्सा होगा। पद्म विभूषण से सम्मानित तीजनबाई का जीवन सबसे खास बदलाव यह है कि अब विद्यार्थी पद्म विभूषण से सम्मानित (लोक गायिका तीजन बाई) प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजनबाई के जीवन और संघर्ष के बारे में पढ़ेंगे। उनके जीवन की कहानी से बच्चों में साहस, मेहनत और कला के प्रति सम्मान की भावना जागेगी। इससे बच्चों को यह समझने में मदद मिलेगी कि अपने क्षेत्र की कला और संस्कृति को अपनाना और बढ़ावा देना कितना महत्वपूर्ण है।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने एनसीईआरटी की नई शिक्षा नीति के अनुसार पाठ्यक्रम में यह सुधार किया है। इसका उद्देश्य बच्चों को सिर्फ अकादमिक ज्ञान नहीं देना, बल्कि उन्हें सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से भी जोडऩा है। इससे विद्यार्थी अपने आसपास की दुनिया और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जान पाएंगे। इन बदलावों से बच्चों को न केवल किताबों का ज्ञान मिलेगा बल्कि वे अपनी लोक पहचान और जड़ों से भी जुड़े रहेंगे। शिक्षक इस नए पाठ्यक्रम के माध्यम से बच्चों में सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी पैदा करने का प्रयास करेंगे। यह पहल बच्चों की समग्र शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देगी और उन्हें आधुनिक जीवन के साथ-साथ अपनी संस्कृति से भी जोड़कर रखेगी।