नई दिल्ली: 20 अगस्त 2026 (गुरुवार) का दिन धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है, इसलिए आज के दिन पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। किसी भी नए या मांगलिक कार्य की शुरुआत से पहले दैनिक पंचांग के माध्यम से शुभ मुहूर्त और राहुकाल का ध्यान रखना बेहद आवश्यक माना जाता है।
| पंचांग अंग |
विवरण |
| दिनांक |
20 अगस्त 2026 |
| वार (दिन) |
गुरुवार |
| माह |
भाद्रपद |
| पक्ष |
शुक्ल पक्ष |
| तिथि |
सप्तमी (सायंकाल तक), तत्पश्चात अष्टमी |
| नक्षत्र |
विशाखा (शाम तक), तत्पश्चात अनुराधा |
| योग |
ब्रह्म योग |
| करण |
वणिज तत्पश्चात विष्टि |
सूर्योदय, चंद्रोदय और सूर्य-चंद्र राशि
शुभ एवं अशुभ समय
-
अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 11:58 बजे से 12:49 बजे तक (किसी भी नए कार्य, निवेश या पूजा के लिए उत्तम)
-
अमृत काल: सुबह 07:25 बजे से 08:58 बजे तक
-
राहुकाल (अशुभ/वर्जित समय): दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक (इस समय में मांगलिक कार्य या यात्रा टालनी चाहिए)
-
दिशाशूल: दक्षिण दिशा (दक्षिण दिशा में यात्रा आवश्यक हो तो गुड़ या जीरा खाकर घर से निकलें)
आज के विशेष उपाय
गुरुवार को भगवान विष्णु को चने की दाल और गुड़ का भोग लगाएं। केले के वृक्ष की पूजा कर जल अर्पित करें और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। आज पीले रंग के वस्त्र पहनना और पीली वस्तुओं का दान करना भाग्योदय में सहायक माना जाता है।