दुर्ग विवि के कुलसचिव की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज, पद के दुरुपयोग और वेतन राशि वसूली मामले में दर्ज है FIR
दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कुलसचिव पर अपने प्रशासनिक पद का दुरुपयोग करने और एक दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी के वेतन से कथित तौर पर राशि वसूलने के आरोप हैं।
मामले में मोहन नगर थाना पुलिस ने 3 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(4) के तहत अपराध दर्ज किया था।
घर में काम करने वाली महिला को विवि में नियुक्त करने का आरोप
मामले के अनुसार, कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप पर आरोप है कि उन्होंने अपने घर में खाना बनाने का काम करने वाली शुभांगी मराठे को करीब दो साल पहले विश्वविद्यालय में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में नियुक्त कराया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि महिला ने विश्वविद्यालय में नियमित रूप से कोई कार्य नहीं किया। बताया गया कि वह कुलसचिव के निर्देश पर केवल महीने के अंतिम दिन विश्वविद्यालय पहुंचती थी और उपस्थिति पंजी में पूरे महीने के हस्ताक्षर करती थी।
वेतन की राशि बेटे के खाते में ट्रांसफर करने का आरोप
महिला के अनुसार, वेतन मिलने के बाद वह करीब 2200 रुपये अपने पास रखती थी, जबकि शेष करीब 9000 रुपये कुलसचिव के पुत्र उदय प्रताप कुलदीप के खाते में ट्रांसफर करती थी।
बताया गया कि जून माह के अंत में जब महिला उपस्थिति दर्ज कराने विश्वविद्यालय पहुंची, तब उसने विश्वविद्यालय प्रशासन को पूरे मामले की जानकारी दी। महिला ने लिखित आवेदन देकर पूरा वेतन दिए जाने और विश्वविद्यालय में वास्तविक कार्य पर नियुक्त करने की मांग की।
महिला ने अपने दावों के समर्थन में बैंक पासबुक की प्रतियां, शपथपत्र, बैंक स्टेटमेंट और यूपीआई ट्रांजेक्शन से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए।
विश्वविद्यालय ने गठित की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी
मामले की जानकारी सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तथ्यों की जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया। समिति ने मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की जांच की।
कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय की ओर से एसएसपी दुर्ग को उचित कानूनी कार्रवाई के लिए रिपोर्ट सौंपी गई। इसके बाद कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप के खिलाफ मोहन नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
एफआईआर और जांच रिपोर्ट को दी थी चुनौती
कुलसचिव ने एफआईआर को रद्द कराने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके साथ ही उन्होंने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के गठन और उसकी जांच रिपोर्ट को चुनौती देते हुए अलग से रिट याचिका भी दाखिल की थी।
याचिका में छत्तीसगढ़ राज्य, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, कुलपति, सहायक कुलसचिव, जांच समिति की समन्वयक एवं डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. नीलू श्रीवास्तव और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी शुभांगी मराठे सहित अन्य को प्रतिवादी बनाया गया था।
हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब मामले में दर्ज एफआईआर और जांच से जुड़ी आगे की कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
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