आज है गुरु पूर्णिमा : जाने तिथि, पवित्र नदियों में स्नान-दान का महत्व और शुभ मुहूर्त
नई दिल्ली: सनातन परंपरा में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाने वाली यह पूर्णिमा भगवान वेद व्यास की जयंती के रूप में भी प्रसिद्ध है, इसलिए इसे 'व्यास पूर्णिमा' भी कहा जाता है। इस दिन गुरुजनों का पूजन करने, पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्टों का निवारण होता है।
आइए जानते हैं गुरु पूर्णिमा की तिथि, स्नान-दान का महत्व और पूजन के शुभ मुहूर्त के बारे में:
गुरु पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है।
-
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ अलसुबह से होता है।
-
पूर्णिमा तिथि समाप्त: देर रात्रि तक पूर्णिमा तिथि का विस्तार रहता है।
-
शुभ मुहूर्त (स्नान-दान समय): ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 04:15 बजे से 05:00 बजे तक) में गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
-
गुरु पूजन मुहूर्त: प्रातः काल सूर्योदय के पश्चात से लेकर दोपहर के अभिजित मुहूर्त (11:55 AM से 12:50 PM) तक गुरु पूजन का उत्तम समय रहता है।
पवित्र नदियों में स्नान का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु पूर्णिमा पर गंगा, यमुना, गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के सभी कायिक, वाचिक और मानसिक पापों का नाश होता है।
-
आध्यात्मिक शुद्धि: इस दिन पवित्र जल में डुबकी लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है।
-
तीर्थ स्नान का फल: यदि किसी कारणवश पवित्र नदी में जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करने से भी तीर्थ स्नान के समान ही पुण्य मिलता है।
गुरु पूर्णिमा पर दान का महत्व
गुरु पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य करने का विशेष विधान है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान देने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
-
अन्न और वस्त्र दान: गरीबों और भूखों को भोजन कराना, गेहूं, चावल, तिल, चने की दाल का दान करना शुभ माना जाता है।
-
पीली वस्तुओं का दान: गुरु ग्रह (बृहस्पति) को मजबूत करने के लिए चने की दाल, पीले वस्त्र, हल्दी, पीला फल और धार्मिक पुस्तकों का दान करना अत्यंत फलदायी होता है।
-
गौ सेवा: इस दिन गायों को हरा चारा या गुड़ खिलाने से पारिवारिक क्लेश दूर होते हैं।
गुरु पूजन की सरल विधि
-
प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
-
घर के पूजा स्थल पर अपने गुरुदेव की तस्वीर स्थापित करें या मानस रूप से उनका ध्यान करें।
-
गुरु को रोली, चंदन, फूल और अक्षत अर्पित करें।
-
गुरुदेव को पीले वस्त्र या मिष्ठान भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
-
यदि गुरु प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित न हों, तो भगवान विष्णु, महर्षि वेद व्यास या भगवान शिव को जगद्गुरु मानकर पूजन करें।
admin




