कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका, X अकाउंट तुरंत बहाल करने से इनकार; कहा- 'गतिविधियां कुछ आपत्तिजनक'
नई दिल्ली : सोशल मीडिया पर तेजी से सुर्खियां बटोरने वाली डिजिटल मुहिम 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है.
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि इस अकाउंट की प्रकृति अन्य मामलों से थोड़ी अलग है, क्योंकि इसकी पूरी गतिविधियां ही अपने आप में 'कुछ आपत्तिजनक' (Slightly Offending) प्रतीत होती हैं.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब 21 मई को भारत सरकार के निर्देश पर राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) से मिले इनपुट का हवाला देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल को भारत में 'विथहोल्ड' (प्रतिबंधित) कर दिया गया था.
अभिजीत दीपके (जो वर्तमान में अमेरिका में हैं) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिबल ने दलील दी कि यह अकाउंट पूरी तरह से विशुद्ध राजनीतिक व्यंग्य (Pure Satire) पर आधारित है.
हाई कोर्ट ने तुरंत राहत देने से क्यों किया इनकार?
जस्टिस कौरव ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर अंतरिम राहत देने से मना करते हुए कहा:
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व्यापक प्रभाव (Wider Ramifications): अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, इसलिए बिना सरकार और मध्यस्थ (X) का पक्ष सुने कोई भी एकतरफा आदेश पारित नहीं किया जा सकता.
मामले की समग्र (Holistic) समीक्षा जरूरी है. -
पूरी गतिविधियों पर सवाल: कोर्ट ने कहा कि पहले के जिन मामलों का हवाला दिया जा रहा है, उनमें कुछ चुनिंदा पोस्ट आपत्तिजनक थीं, लेकिन इस मामले में अकाउंट की पूरी गतिविधि और उसके प्रभाव को लेकर चिंताएं जताई गई हैं.
संवैधानिक 'रिव्यू कमेटी' को भेजा मामला
हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी न करते हुए याचिकाकर्ता को आईटी नियमों (IT Rules) के तहत गठित वैधानिक समीक्षा समिति (Review Committee) के समक्ष अपनी बात रखने का निर्देश दिया है.
चूंकि याचिकाकर्ता अभिजीत दीपके देश से बाहर हैं, इसलिए कोर्ट ने उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए रिव्यू कमेटी के सामने पेश होने और अपना पक्ष रखने की अनुमति दी है.
कैसे अस्तित्व में आई 'कॉकरोच जनता पार्टी'?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान कथित तौर पर युवाओं को लेकर कुछ तीखी टिप्पणियां सामने आई थीं.
दिल्ली हाई कोर्ट ने अब इस पूरे मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 6 जुलाई 2026 की तारीख तय की है।

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