कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका, X अकाउंट तुरंत बहाल करने से इनकार; कहा- 'गतिविधियां कुछ आपत्तिजनक'

कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका, X अकाउंट तुरंत बहाल करने से इनकार; कहा- 'गतिविधियां कुछ आपत्तिजनक'

नई दिल्ली : सोशल मीडिया पर तेजी से सुर्खियां बटोरने वाली डिजिटल मुहिम 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने इस व्यंग्यात्मक (Satirical) ऑनलाइन आउटफिट के प्रतिबंधित किए गए एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को तुरंत बहाल करने (Interim Relief) से साफ इनकार कर दिया है. हाई कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X Corp) को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है.

जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि इस अकाउंट की प्रकृति अन्य मामलों से थोड़ी अलग है, क्योंकि इसकी पूरी गतिविधियां ही अपने आप में 'कुछ आपत्तिजनक' (Slightly Offending) प्रतीत होती हैं.

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब 21 मई को भारत सरकार के निर्देश पर राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) से मिले इनपुट का हवाला देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल को भारत में 'विथहोल्ड' (प्रतिबंधित) कर दिया गया था. इस फैसले के खिलाफ CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अधिवक्ता नकुल गांधी के माध्यम से दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.

अभिजीत दीपके (जो वर्तमान में अमेरिका में हैं) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिबल ने दलील दी कि यह अकाउंट पूरी तरह से विशुद्ध राजनीतिक व्यंग्य (Pure Satire) पर आधारित है. उन्होंने कोर्ट से संतुलन बनाने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि सरकार को किसी विशेष पोस्ट पर आपत्ति है, तो केवल उन विशिष्ट पोस्ट को ब्लॉक रखा जाए, लेकिन पूरे अकाउंट पर से प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए.

हाई कोर्ट ने तुरंत राहत देने से क्यों किया इनकार?

जस्टिस कौरव ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर अंतरिम राहत देने से मना करते हुए कहा:

  • व्यापक प्रभाव (Wider Ramifications): अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, इसलिए बिना सरकार और मध्यस्थ (X) का पक्ष सुने कोई भी एकतरफा आदेश पारित नहीं किया जा सकता. मामले की समग्र (Holistic) समीक्षा जरूरी है.

  • पूरी गतिविधियों पर सवाल: कोर्ट ने कहा कि पहले के जिन मामलों का हवाला दिया जा रहा है, उनमें कुछ चुनिंदा पोस्ट आपत्तिजनक थीं, लेकिन इस मामले में अकाउंट की पूरी गतिविधि और उसके प्रभाव को लेकर चिंताएं जताई गई हैं.

संवैधानिक 'रिव्यू कमेटी' को भेजा मामला

हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी न करते हुए याचिकाकर्ता को आईटी नियमों (IT Rules) के तहत गठित वैधानिक समीक्षा समिति (Review Committee) के समक्ष अपनी बात रखने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि यह समिति हर दो महीने में बैठक करती है और ब्लॉकिंग आदेशों की जांच करने के लिए अधिकृत है.

चूंकि याचिकाकर्ता अभिजीत दीपके देश से बाहर हैं, इसलिए कोर्ट ने उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए रिव्यू कमेटी के सामने पेश होने और अपना पक्ष रखने की अनुमति दी है.

कैसे अस्तित्व में आई 'कॉकरोच जनता पार्टी'?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान कथित तौर पर युवाओं को लेकर कुछ तीखी टिप्पणियां सामने आई थीं. हालांकि बाद में उन टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण भी आ गया था, लेकिन इंटरनेट पर युवाओं और मीमर्स ने इसे एक डिजिटल आंदोलन का रूप दे दिया और 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से एक व्यंग्यात्मक अभियान शुरू कर दिया. इस डिजिटल कैंपेन ने इतनी तेजी से लोकप्रियता हासिल की कि इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स की संख्या देखते ही देखते करोड़ों में पहुंच गई, जिसने कई स्थापित राजनीतिक दलों को भी पीछे छोड़ दिया था.

दिल्ली हाई कोर्ट ने अब इस पूरे मामले की अगली विस्तृत सुनवाई के लिए 6 जुलाई 2026 की तारीख तय की है।