बंगाल में ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’ गेमचेंजर, ‘महतारी वंदन’ का फार्मूला काम आया

बंगाल में ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’ गेमचेंजर, ‘महतारी वंदन’ का फार्मूला काम आया

रायपुर। प. बंगाल की जीत में ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’ गेमचेंजर साबित हुआ। भाजपा ने ममता बनर्जी की ‘लक्ष्मीर भंडार’ (1500 रुपये) के जवाब में महिलाओं को 3000 रुपये प्रति माह देने का जो मास्टर स्ट्रोक खेला, उसकी पटकथा छत्तीसगढ़ की ‘महतारी वंदन योजना’ की सफलता को देखकर लिखी गई थी। प. बंगाल की सियासत में आए ऐतिहासिक बदलाव ने दिल्ली से लेकर रायपुर तक राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

ममता बनर्जी के जिस अभेद्य किले को भेदना नामुमकिन माना जा रहा था, उसे छत्तीसगढ़ के रणनीतिकारों ने अपनी ‘साइलेंट वर्किंग’ से ध्वस्त कर दिया। प्रदेश के संगठन महामंत्री पवन साय पिछले आठ महीनों से बंगाल में जमे हुए थे। 60 से अधिक विधानसभा सीटों पर संगठन की जड़ें गहरी करने का श्रेय उन्हें जाता है। वहीं, कलकत्ता को अपना वार-रूम बनाकर सौरभ सिंह ने 52 शहरी सीटों पर कमान संभाल रखी थी। इन नेताओं ने न केवल रणनीति बनाई, बल्कि मतगणना के आखिरी मिनट तक मोर्चे पर डटे रहे। अनुराग सिंहदेव और दयालदास बघेल जैसे नेताओं ने घर-घर जाकर फार्म भरवाए, जिससे साइलेंट वोटर भाजपा की ओर झुक गया।

बंगाल में ‘पवन साय’ का बवंडर, 56 सीटों का जिम्मा, 51 में जीते 

पश्चिम बंगाल में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिल गई है। इस प्रचंड जीत में छत्तीसगढ़ की मेहनत शामिल है। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन ने छत्तीसगढ़ के संगठन महामंत्री पवन साय को 56 सीटों का बड़ा जिम्मा दिया था। भरोसा ऐसा था कि चुनाव की तारीखों का ऐलान होने से काफी पहले पश्चिम बंगाल भेज दिया गया। उनके साथ प्रदेश के करीब तीन दर्जन से ज्यादा नेताओं को भी वहां पर बड़ा जिम्मा दिया गया। इन नेताओं ने दिन रात एक करके वहां पर जीत के लिए काम किया। इसका नतीजा यह रहा है कि छत्तीसगढ़ के नेताओं के जिम्मे जो सीटें थीं, उनमें से अधिकतर सीटों पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया है। सूत्र बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन ने छत्तीसगढ़ का फार्मूला पश्चिम बंगाल में आजमाया। छत्तीसगढ़ में एक वक्त कांग्रेस को हराना असंभव लग रहा था। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन ने पवन साय पर बड़ा भरोसा जताते हुए उनको बंगाल में 56 विधानसभाओं का जिम्मा सौंपा। यह जिम्मा मिलने के बाद प्रारंभ में तो पवन साय बंगाल आना-जाना करते रहे, लेकिन बाद में उन्होंने वहीं पर अपना ठिकाना बना लिया और करीब छह माह वहां पर रहकर जीत की रणनीति बनाते रहे। 

झालमुड़ी के संग गूंजा विजय का उत्सव

बंगाल के जनादेश का स्वाद छत्तीसगढ़ तक 

अब विकास और सुशासन ही प्राथमिकता: सीएम

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को प्राप्त ऐतिहासिक जनादेश की गूंज छत्तीसगढ़ में भी सुनाई दी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ राजनांदगांव जिले के मोतीपुर में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, सांसद संतोष पांडेय, महापौर मधुसूदन यादव सहित भाजपा परिवार के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने उल्लास के साथ विजय का उत्सव मनाया। इस उत्सव को खास बनाने के लिए बंगाल की पहचान माने जाने वाले पारंपरिक व्यंजन झालमुड़ी का स्वाद भी शामिल किया गया। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने इस बार अपने मताधिकार के माध्यम से एक स्पष्ट संदेश दिया है कि विकास और सुशासन ही प्राथमिकता है। यह जनादेश तुष्टिकरण, भय और भ्रष्टाचार की राजनीति को नकारते हुए एक नए विश्वास, नई दिशा और मजबूत राष्ट्रनिर्माण की भावना को दर्शाता है। साथ ही यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहे ‘विकसित भारत’ के संकल्प में जनता की भागीदारी और भरोसे का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह जीत उस सोच की है जो देश को आगे बढ़ाने, जोड़ने और सशक्त बनाने में विश्वास रखती है।