नई दिल्ली: सनातन धर्म में किसी भी मांगलिक, धार्मिक या नए कार्य की शुरुआत करने से पहले उस दिन के पंचांग का अवलोकन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 7 अगस्त (शुक्रवार) का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व रखता है। यह सावन (श्रावण) मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। शुक्रवार का दिन धन, समृद्धि और सौंदर्य की देवी मां लक्ष्मी और शुक्र देव की आराधना के लिए समर्पित होता है।
पंचांग के जरिए तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ-अशुभ मुहूर्तों की सटीक जानकारी मिलती है, जिससे आप अपने दिन के महत्वपूर्ण कार्यों को बिना किसी विघ्न के योजनाबद्ध तरीके से कर सकते हैं। आइए जानते हैं 7 अगस्त का संपूर्ण पंचांग:
तिथि और संवत
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तारीख: 7 अगस्त
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दिन: शुक्रवार
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मास: श्रावण (सावन)
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पक्ष: कृष्ण पक्ष
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तिथि: दशमी तिथि
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विक्रम संवत: 2083
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शक संवत: 1948
सूर्य और चंद्रमा का समय
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सूर्योदय: प्रातः 05:46 बजे
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सूर्यास्त: सायं 07:05 बजे
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चंद्रोदय: रात्रि 03:10 बजे (8 अगस्त)
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चंद्रास्त: दोपहर 03:55 बजे
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चंद्र राशि: वृषभ राशि (रात तक), तत्पश्चात मिथुन राशि
नक्षत्र, योग और करण
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नक्षत्र: रोहिणी नक्षत्र, तत्पश्चात मृगशिरा नक्षत्र
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योग: हर्षण योग, तत्पश्चात वज्र योग
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करण: विष्टि करण (भद्रा), तत्पश्चात बव करण
शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:22 बजे से 05:04 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक (मां लक्ष्मी की पूजा, नए व्यवसाय और खरीदारी के लिए सर्वश्रेष्ठ)
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:41 बजे से 03:34 बजे तक
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गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:05 बजे से 07:27 बजे तक
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अमृत काल: रात्रि 08:15 बजे से 09:50 बजे तक
अशुभ समय और राहुकाल (Inauspicious Timings)
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राहुकाल: प्रातः 10:46 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक (इस समय के दौरान कोई भी नया कार्य, शुभ संकल्प या वित्तीय लेनदेन करने से बचें)
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यमगंड: दोपहर 03:46 बजे से सायं 05:26 बजे तक
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गुलिक काल: प्रातः 07:26 बजे से 09:06 बजे तक
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दिशा शूल: पश्चिम दिशा (शुक्रवार के दिन पश्चिम दिशा में यात्रा करने से परहेज करना चाहिए। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो घर से दही या मीठी चीजें खाकर ही प्रस्थान करें)